जम्मू3 मिनट पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू
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जम्मू-कश्मीर में चल रही सालाना ‘अमरनाथ यात्रा’ के रूट पर जवान पहरा दे रहे हैं।
अमरनाथ यात्रा देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ बनने जा रही है। तीन जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा में चार लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल होंगे। बावजूद इसके कोई कचरा लैंडफिल में नहीं जाएगा।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 को ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत यात्रा मार्ग पर निकलने वाले कचरे को संसाधन में बदला जा रहा है। खच्चरों के गोबर से बायोगैस बनाई जाएगी।
प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए वाटर एटीएम लगाए गए हैं और पूरे मार्ग पर वैज्ञानिक तरीके से ठोस व तरल कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है। यह पहल स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग कर रहा है।

श्रद्धालु बालटाल मार्ग से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर रवाना होते हुए।
700 मीट्रिक टन कचरा निकलेगा
अनुमान है कि यहां करीब 700 मीट्रिक टन कचरा निकलेगा। इसके लिए बालटाल व पहलगाम दोनों मार्गों पर डस्टबिन लगाए हैं और विशेष सफाई दल तैनात किए गए हैं, जो ठोस और तरल दोनों प्रकार के कचरे का संग्रह और वैज्ञानिक निस्तारण कर रहे हैं।
ग्रामीण स्वच्छता विभाग की महानिदेशक अनु मल्होत्रा बताती हैं कि यात्रा शुरू होने के पहले दिन से ही सफाईकर्मी लगातार कचरा एकत्र कर रहे हैं और हाई-एंड मशीनों के जरिए उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा रहा है।
अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला
अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल गया है। अभी यात्रा के पांच दिन ही बीते हैं। 57 दिन चलने वाली यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी।
यात्रा के पहले चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को पांचवें दिन यह संख्या 1 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है।
यात्रा के लिए इस साल 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यानी कि अभी 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी है। पूरी खबर पढ़ें…

9 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन स्लॉट बुक, प्रशासन बोला- नए यात्री कुछ दिन रुकें
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अमरनाथ पहुंच रहे यात्रियों से कहा है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें। प्रशासन के मुताबिक, 9 जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।
ऐसे में अगर कोई यात्री बिना रजिस्ट्रेशन बालटाल या पहलगाम रूट से आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे चेक पॉइंट्स पर रोक दिया जाएगा। उसे 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।अधिकारियों ने कहा कि रविवार से केवल रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी।
अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला
अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है।
इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है।

यात्रा के 2 रूट, एक 48km लंबा लेकिन सरल, दूसरा 14km का लेकिन कठिन चढ़ाई
अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी।

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