यूपी राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में पुरातन छात्र सम्मेलन:वर्षों बाद मिले पूर्व छात्र, पुरानी यादें हुईं ताजा


प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के यमुना परिसर में रविवार को पुरातन छात्र सम्मेलन आयोजित किया गया। त्रिवेणी बहुउद्देशीय भवन में हुए कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र वर्षों बाद एक मंच पर जुटे। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादें ताजा कीं और एक-दूसरे से मुलाकात की। रविवार को आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पूर्व छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कुलपति, शिक्षक, चिकित्सक और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय और वर्तमान विद्यार्थियों के साथ जुड़े रहने की अपील की। सम्मेलन में पहुंचे पूर्व छात्र एक-दूसरे से गले मिले और पुराने दिनों की यादें साझा कीं। वर्षों बाद अपने पुराने परिसर में लौटे पूर्व छात्रों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। सभी ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों को याद करते हुए विश्वविद्यालय से जुड़े संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि डिजिटल युग में लोग सोशल मीडिया से तो जुड़े हैं, लेकिन आपसी रिश्तों में पहले जैसी आत्मीयता कम होती जा रही है। ऐसे सम्मेलन लोगों को फिर से जोड़ने और एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करने का अवसर देते हैं। मुख्य अतिथि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप चौरसिया ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज और नियमित जांच जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत उसके पुरातन छात्र होते हैं। उन्होंने पूर्व छात्रों से अपने अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के साथ साझा करने और विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग देने का आह्वान किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहायक महाप्रबंधक निशांत दुबे ने आर्थिक स्वावलंबन और बैंकिंग जागरूकता पर अपने विचार रखे। सम्मेलन में पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश यादव, डॉ. सुग्रीव सिंह, डॉ. हेमंत शुक्ला, डॉ. बुद्ध प्रिया, डॉ. रेवा सिंह, जे.एन. यादव, अमन गोयल, डॉ. सत्यव्रत शुक्ला, प्रो. छत्रसाल सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र और शिक्षक मौजूद रहे।

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