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उन्नाव शहर के चौधराना स्थित चौधरी सैय्यद क़ासिम हुसैन ज़ैदी के इमामबारगाह में शनिवार रात 114 वर्ष पुरानी शब्बेदारी की परंपरा पूरी अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ निभाई गई। देर रात शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन रविवार सुबह तक चला, जिसमें शहर के अलावा आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। पूरी रात इमामबारगाह में ग़म-ए-हुसैन का माहौल रहा और श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन (अ.स.) तथा शोहदाए कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश की। शब्बेदारी के दौरान आयोजित मजलिस को मौलाना सैय्यद नामदार अब्बास ने ख़िताब किया। उन्होंने कर्बला की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत सत्य, न्याय, इंसाफ, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम हर दौर में इंसान को सब्र, कुर्बानी, भाईचारे और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके बयान को अकीदतमंदों ने पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ सुना। मजलिस के समापन के बाद विभिन्न क्षेत्रों से आई अंजुमनों ने नौहाखानी और सीनाजनी की। रातभर नौहों की सदाएं गूंजती रहीं और मातम के जरिए शोहदाए कर्बला को याद किया गया। इमामबारगाह में मौजूद लोगों ने धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए पूरी अकीदत के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। आयोजन स्थल पर युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी संख्या देखने को मिली। श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
आयोजकों ने बताया कि चौधराना की शब्बेदारी की शुरुआत वर्ष 1912 में हुई थी। तब से यह परंपरा लगातार बिना किसी व्यवधान के हर वर्ष निभाई जा रही है। 114 वर्षों से चली आ रही यह शब्बेदारी उन्नाव की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। मुहर्रम के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में हर साल बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी को याद करते हैं और उनके बताए हुए सत्य एवं इंसानियत के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। रविवार सुबह शब्बेदारी के समापन के बाद पारंपरिक ताज़िया जुलूस निकाला गया, जिसे कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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उन्नाव में 114 साल पुरानी शब्बेदारी, उमड़ा जनसैलाब:सुबह ताज़िया कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक, धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न