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12 मिनट पहले
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चेक रिपब्लिक की 21 साल की टेनिस खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने विंबलडन 2026 का विमेंस सिंगल्स खिताब अपने नाम कर लिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर खेले गए फाइनल मुकाबले में नौवीं सीड नोस्कोवा ने अपनी ही हमवतन और पेरिस ओलिंपिक की डबल्स पार्टनर कैरोलीना मुहोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से शिकस्त दी। विंबलडन के इतिहास में यह पहली बार था जब दो चेक खिलाड़ियों के बीच फाइनल मैच खेला गया। इस जीत के साथ ही नोस्कोवा को करीब 38.5 करोड़ रुपए (£3.6 मिलियन) की इनामी राशि मिली और वे अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 7वीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगी।
मैच पॉइंट गंवाने के बाद कांपने लगी थीं नोस्कोवा मैच के दौरान एक समय ऐसा आया जब नोस्कोवा आसानी से जीत की तरफ बढ़ रही थीं। वे दूसरे सेट में 6-2, 5-2 से आगे थीं। इसके बाद 10वीं सीड मुहोवा ने जोरदार वापसी की और लगातार 5 गेम जीतकर दूसरा सेट 7-5 से अपने नाम कर लिया। इस दौरान दबाव में नोस्कोवा का बॉडी लैंग्वेज देखने लायक था। वे क्राउड के शोर से बचने के लिए कानों में उंगलियां डालती दिखीं और चेंजओवर के समय विंबलडन के तौलिये में अपना चेहरा छिपा लिया। हालांकि, तीसरे सेट में उन्होंने खुद को संभाला और जीत कर इतिहास रच दिया। आसमान की तरफ चूमा हाथ: दो साल पहले विंबलडन से ठीक पहले मां को खोया था जीत के बाद नोस्कोवा कोर्ट पर ही बैठ गईं और भावुक हो गईं। ट्रॉफी मिलने के बाद स्पीच के दौरान वे रो पड़ीं। उन्होंने आसमान की तरफ देखते हुए फ्लाइंग किस किया और अपनी दिवंगत मां को याद किया। नोस्कोवा ने कहा,’दो साल पहले विंबलडन की शुरुआत से ठीक पहले मेरी मां इवाना का निधन हो गया था। मैं उनके बिना आज यहां नहीं होती। मैं अपने पिता को भी धन्यवाद देना चाहती हूं, जो मेरे लिए फ्लाइट का डर होने के बावजूद यहां मैच देखने आए।’
मुहोवा ने मजाकिया अंदाज में कहा- लिंडा मेरी ‘एक्स-फ्रेंड’ हैं हार के बाद भावुक मुहोवा ने उपविजेता की ट्रॉफी लेते समय रोते हुए कहा,’शब्द ढूंढना मुश्किल है, लेकिन मैं अपनी ‘पूर्व दोस्त’ (एक्स-फ्रेंड) लिंडा से शुरुआत करूंगी। आपने जिस तरह से दबाव को संभाला और खेला, वह अविश्वसनीय था। आप इस जीत की हकदार हैं।’ उन्होंने आगे कहा,’मैं आगे भी लड़ती रहूंगी। मुझे यह ट्रॉफी चाहिए और उम्मीद है कि मैं फिर से फाइनल में पहुंचकर इसे जीतूंगी।” बता दें कि मुचोवा पिछले कुछ समय से कलाई की गंभीर चोट से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्हें एक समय सिंगल-हैंडेड बैकहैंड से खेलना पड़ा था।
मैच पॉइंट बचाकर चैंपियन बनने वाली तीसरी खिलाड़ी: वीनस और सेरेना के क्लब में हुईं शामिल नोस्कोवा इस पूरे टूर्नामेंट में कठिन परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ी हैं। वे इस टूर्नामेंट के तीसरे दौर में रोमानिया की सोराना सिर्स्टिया के खिलाफ मैच पॉइंट से पिछड़ रही थीं, लेकिन वहां से वापसी कर उन्होंने मैच जीता। विंबलडन के इतिहास में मैच पॉइंट बचाकर खिताब जीतने वाली वे केवल तीसरी महिला खिलाड़ी हैं। उनसे पहले यह कारनामा वीनस विलियम्स (2005) और सेरेना विलियम्स (2009) ही कर सकी थीं।
