Mathura IITian Baba Bail Rejected

मथुरा कोर्ट ने IITian बाबा की जमानत याचिका खारिज कर दी

मथुरा के राधाकुंड में दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर युवतियों का शारीरिक शोषण करने वाले IITian बाबा की जमानत याचिका मथुरा कोर्ट ने खारिज कर दी। शनिवार को अपर सत्र न्यायधीश एवं स्पेशल कोर्ट EC Act में आरोपी की जमानत पर अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों

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छत्तीसगढ़ की युवती ने लगाया था शोषण का आरोप

राधाकुंड कस्बे में रहने वाले अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास पर छत्तीसगढ़ की रहने वाली एक युवती ने आरोप लगाया था कि वह BSc नर्सिंग की छात्रा ने आरोप लगाया कि वह 15 मई को IOCL में इंटर्नशिप कर रही अपनी बहन से मिलने मथुरा आई थी। उसकी बहन राधाकुंड में किराए के मकान में रहती थी। यहां जब वह बहन के पास पहुंची तो वह नहीं मिली,बहन ने बताया वह भजन कीर्तन करने अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास के पास है। इसके बाद पीड़िता वहीं रुक गई जहां आरोपी अभिषेक मिश्रा ने पीड़िता के साथ दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया और फिर अश्लील हरकत की।

पीड़ित युवती की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी

पीड़ित युवती की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी

पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद आरोपी को किया गिरफ्तार

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली और मामले की जांच करने के बाद आरोपी अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने कई युवतियों का शोषण किया था। आरोपी प्रसाद का दूध बताते हुए युवतियों को देता था और फिर उनका शोषण करता था। दूध में वह भांग मिलाकर देता था। जिससे युवतियां अचेत हो जाती थीं। आरोपी मूल रूप से उड़ीसा का रहने वाला था और वह खुद जॉब छोड़कर मथुरा आया जहां वह भक्ति करने का दिखावा करने लगा था। आरोपी की हरकतों की जानकारी मिलने पर उसकी मां भी उसे छोड़कर चली गई थी।

पुलिस ने अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास को गिरफ्तार कर लिया था

पुलिस ने अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास को गिरफ्तार कर लिया था

कोर्ट में हुई बहस

आरोपी की जमानत पर शनिवार को अपर सत्र न्यायधीश एवं स्पेशल कोर्ट EC Act राजेश पाराशर की अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों में बहस हुई। दोनों ने अपने अपने तर्क रखे। ADGC क्राइम मुकेश गोस्वामी ने बताया कि आरोपी अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास पर गंभीर प्रवृत्ति के आरोप हैं इसको जमानत दिए जाने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी पर लगाए गए आरोप झूठे हैं,उसे फंसाया गया है। FIR देरी से की उनके मुवक्किल का कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता,पीड़ित पक्ष के बयान और मौजूद अभिलेखों को आधार मानते हुए आरोपी की जमानत खारिज कर दी।

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