मेरठ में लाठीचार्ज को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग:दिनभर एसएसपी विरोधी पोस्ट चलीं तो देर शाम पुलिसकर्मियों ने एसएसपी को दिया समर्थन


मेरठ में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद मामला सड़क से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। एक ओर जहां कुछ लोग एसएसपी अविनाश पांडेय की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी पक्ष ने एसएसपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग कर दी है। पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समर्थन और विरोध की पोस्ट चर्चाओं में रहीं। पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में सामने आए लोगों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद भी सख्ती बरती। एसएसपी अविनाश पांडेय ने पुलिस वैन में घुसकर प्रदर्शनकारी रवि गौतम एडवोकेट के साथ मारपीट की, जिसके बाद रवि गौतम ने आत्महत्या का प्रयास किया। इस घटना को लेकर विभिन्न संगठनों और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाते हुए एसएसपी को हटाने की मांग उठाई है। विरोधी पक्ष का कहना है कि पुलिस अधिकारियों को संयम बरतना चाहिए था। एसएसपी के समर्थन में आए पुलिसकर्मी
गुरुवार को शाम होते होते जिले के पुलिसकर्मी भी खुलकर एसएसपी के समर्थन में उतर आए। थानेदारों, उपनिरीक्षकों, हेड कांस्टेबलों और कांस्टेबलों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर एसएसपी की कार्रवाई को उचित ठहराया। पुलिसकर्मियों का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस का दायित्व है। वायरल पोस्ट से गर्माता रहा माहौल दिनभर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध की पोस्ट वायरल होती रहीं, जिससे माहौल और गर्माता गया। दलित संगठनों के साथ अब उन संगठनों ने भी मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है जो सामाजिक मुद्दों की लड़ाई अलग अलग मंच से लड़ते रहे हैं। जिस तरह के हालात तैयार हो रहे हैं, उसे देखकर प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में हंगामा और तेजी से बढ़ेगा। योजना या हकीकत, दो पोस्ट वायरल सोशल मीडिया पर AI की पोस्ट डाली जा रही हैं। ना केवल पक्ष बल्कि विपक्ष के लोग भी AI पोस्ट का प्रयोग कर रहे हैं। एसएसपी अविनाश पांडेय के समर्थन में जो पोस्ट डाली जा रही हैं, उनमें उन्हें हीरो दिखाया गया है। एक पोस्ट में एसएसपी को योद्धा बताते हुए उनकी कार्यनिष्ठा, ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक छवि की सराहना की गई, जबकि दूसरी पोस्ट में उन्हें सिंघम बताया गया। पोस्ट में लिखा गया कि कानून का सम्मान कराने के लिए ऐसे ही कड़े निर्णय लेने वाले अधिकारियों की जरूरत है। सोशल मीडिया पर छिड़ी यह जंग अब जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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