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लखनऊ में नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियों वाला इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया है। इस कॉल सेंटर की बिल्डिंग का किराया सभी खर्चों को मिलाकर करीब 3 करोड़ रुपए होता है। कॉल सेंटर में 5 राउंड इंटरव्यू के बाद सिलेक्शन होता था। पुलिस को जब भनक लगी कि यह कॉल सेंटर नहीं, बल्कि साइबर ठगी का अड्डा है तो यहां रेड मार दी। बुधवार दोपहर हुए इस एक्शन में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर से 119 लोग हिरासत में लिए गए। इसके साथ ही 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग फोन, कई डिजिटल मशीन, डॉक्यूमेंट्स बरामद हुए। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने जब इस फर्जी कॉल सेंटर की पड़ताल की। बाहर ताला लटका मिला, लेकिन पूरे हॉल में लैविश सीन दिखा। रेड की सूचना मिलते ही एक कर्मचारी के घरवाले पहुंच गए थे। उन्होंने कैमरे के सामने बोले से मना किया, लेकिन बताया कि उनके लड़के ने 5 राउंड इंटरव्यू दिया था। ज्यादातर लड़के-लड़कियां 25 हजार से 28 हजार रुपए महीने की नौकरी पर हैं। लेकिन, अगर इनके जरिये किसी को ठग लिया गया, उस रकम का 10% इनसेंटिव मिलता था। इस रिपोर्ट में जानिए फर्जी कॉल सेंटर के रूप में चल रहा ठगी का यह गैंग किस माध्यम से ठगी करता था, यहां किन-किन पदों पर लोग यहां काम करते थे, कितनी सैलरी थी, टारगेट मिलता था या शिकार मिलने पर इनसेंटिव था, कैसे पकड़े गए और अब तक कितने रुपए ठग चुके…? 2 तस्वीरें देखिए- ठगों की कार्यशैली- रात में एक्टिव होते थे जालसाज पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर की आड़ में यहां से ‘डॉलर’ नाम का एप ऑपरेट किया जा रहा था। इसी के जरिये अलग-अलग देशों में कॉल के जरिये लोगों को लालच देकर धोखाधड़ी करते थे। यह कॉल सेंटर मुख्य रूप से शाम 7 से रात 3 बजे तक संचालित होता था। इसका मुख्य टारगेट विदेश में बैठे लोग होते थे। जालसाजों ने समिट बिल्डिंग के 11वीं मंजिल पर दो ऑफिस लेकर Solaris Solution नाम से कंपनी बनाकर ठगी कर रहे थे। विदेश में बैठा सरगना कर्मचारी हायर करके काम करवाता छापे के दौरान पुलिस टीम ने नारायणदास खैराजानी अहमदाबाद गुजरात निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को पकड़ा। दोनों मौजूदा समय में गोमतीनगरविस्तार में रहते हैं। दोनों ही ऑपरेशन मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। इंडिया से ठगी का काम यही दोनों देखते थे। इसके लिए कई कर्मचारी रखे गए थे। पुलिस दोनों से पूछताछ कर मुख्य आरोपी तक पहुंचने में लगी है। रिफंड करने या गूगल सर्च करने पर शिकार बनाते ऑनलाइन शॉपिंग करने के बाद कई बार लोग चीज न समझ आने पर रिफंड करना चाहते हैं। जिसके लिए वो गूगल सर्च करते हैं। गूगल पर सर्च करते ही कस्टमर का डाटा जालसाजों के पास पहुंच जाता। तुरंत कॉल बैक करके सर्च करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आ जाते। इसके बाद मदद करने के बहाने उससे अलग-अलग प्रोसे कराते। इसके बाद ओटीपी भेजकर खाता खाली कर देते। आमदनी और खर्च- 200 करोड़ रुपए से ज्यादा ठगे पुलिस को कॉल सेंटर से मिले साक्ष्य के आधार पर माना जा रहा है। इन लोगों ने विदेशी नागरिकों से 200 करोड़ से ज्यादा रुपए की अब तक ठगी की है। अलग-अलग तरह का प्रलोभन देकर झांसे में लेते थे। सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, साथ ही इनकी ट्रांजैक्शन चेन भी खंगाली जा रही है। बिल्डिंग का खर्च 3 करोड़ सालाना सूत्रों की मानें तो बिल्डिंग का दो हिस्सा किराये पर लेकर ऑफिस चल रहा था। बिल्डिंग का किराया और अन्य खर्चे मिलाकर सालाना करीब 3 करोड़ रुपए खर्च होते थे। करीब एक साल से ऑफिस चल रहा था। बताया जा रहा है विदेश से शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसके बाद कार्रवाई हो सकी। वर्किंग और सैलरी- सबसे ज्यादा नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां थीं इस काम को करने के लिए नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां ज्यादा जुड़ी थीं। पकड़े जाने के बाद सबने बताया ज्यादा रुपए के लालच में काम कर रही थीं। नकी इंग्लिश का एक्संट इतना अच्छा होता है कि विदेश में बैठा व्यक्ति झांसे में आ जाता है। इसका फायदा उठाकर उसका खाता खाली करा लिया जाता था। सैलरी से ज्यादा बोनस मिलता था इस कॉल सेंटर में काम करने वालों की इंग्लिश काफी अच्छी है। पूरा संचालन इंग्लिश में ही होता था। काम के एवज में सैलरी 25 हजार से 28 हजार रुपए ही थी। लेकिन, ठगी से आए रुपए पर इन्हें 10 प्रतिशत इनसेंटिव मिलता था। यह इनसेंटिव सैलरी से कहीं ज्यादा होती थी। सूत्रों की मानें तो हर कर्मचारी हर महीने 80 हजार से एक लाख रुपए तक कमा रहा था। इसके साथ ही काम करने वाले सभी कर्मचारियों को इसकी जानकारी थी कि वे लोग ठगी कर रहे हैं। फॉरेंसिक के लिए भेजे जाएंगे सभी दस्तावेज बरामद हुए सभी डिजिटल उपकरणों एवं दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनकी टेक्निकल एवं फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे साइबर अपराध के नेटवर्क, पीड़ितों, कॉलिंग मॉड्यूल एवं वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत इकठ्ठा किए जा सकें। एडीसीपी किरण यादव क्राइम का कहना है- इस नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। बचे आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। ————————– संबंधित खबर पढ़िए- समिट बिल्डिंग में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़:रिफंड दिलाने के नाम पर देश-विदेश में ठगी, चेहरा छिपाकर निकलीं लड़कियां लखनऊ के विभूति खंड थाना क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग के 11वीं मंजिल पर फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया। सोलारिस सॉल्यूशन (Solaris Solution) के नाम से कॉल सेंटर का संचालन हो रहा था। यहां बैठकर डॉलर एप के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस ने करीब 12 घंटे तक कॉल सेंटर में सर्च अभियान चलाया। इसके बाद 2 ऑपरेशन मैनेजर समेत 119 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया गया। आरोपियों की संख्या अधिक होने के कारण पुलिस को बसें बुलानी पड़ीं। बाहर निकलते समय युवतियां अपने बाल-दुपट्टे और हाथ से चेहरा छिपाती दिखीं। (पूरी खबर पढ़िए)
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लखनऊ में नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियों वाला इंटरनेशनल कॉल सेंटर:बिल्डिंग का किराया 3 करोड़ सालाना, 5 राउंड इंटरव्यू के बाद होता सिलेक्शन