![]()
सहारनपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि यह केवल मतदाता सूची के संशोधन का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। बुधवार को जारी बयान में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यदि नागरिकों को बार-बार अपनी पहचान और मतदान के अधिकार को साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ें, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना था कि चुनाव आयोग का दायित्व निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है, न कि नागरिकता की जांच करना। उन्होंने कहा कि वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले भी आशंका जताई गई थी कि यह कहीं राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसी व्यवस्था का रूप न ले ले। उनका दावा है कि मौजूदा प्रक्रिया की कार्यप्रणाली और प्रभाव पहले की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से अलग दिखाई दे रहे हैं। मदनी ने आरोप लगाया कि दस्तावेज जमा कराने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस आशंका में हैं कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहेगा या नहीं। उनका कहना है कि यदि मतदान का अधिकार अनिश्चितता के दायरे में आ जाएगा, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि एसआईआर की प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक मतदाताओं, विशेष रूप से एक वर्ग के लोगों, को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा सकती है। जमीयत ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तथा नागरिकों के अधिकारों के अनुरूप संचालित करने की मांग की।
Source link
सहारनपुर में एसआईआर प्रक्रिया पर मौलाना मदनी का बयान:बोले– मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर नागरिकों को बार-बार दस्तावेज देने को मजबूर करना उचित नहीं