देवालय समिति की वृंदावन में हुई मीटिंग:यमुना की अविरल धारा के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाएगी समिति,मंदिरों की परंपराओं पर यमुना प्रदूषण के दुष्प्रभाव पर जताई चिंता


ब्रज की आराध्या मां यमुना के बढ़ते प्रदूषण और लुप्त होती अविरल धारा ने अब ब्रज के देवालयों की चिंता बढ़ा दी है। वृंदावन स्थित रंगजी मंदिर के बड़े बगीचे में आयोजित ‘ब्रज वृंदावन देवालय समिति की बैठक में प्रबुद्धजनों और सेवायतों ने एक स्वर में यमुना की दुर्दशा पर क्षोभ व्यक्त किया। निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की मांग करेगा। यमुना के प्रदूषित होने की बजह से नहीं हो रहा परंपराओं का निर्वहन राधारमण मंदिर के सेवायत आलोक गोस्वामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ब्रज के प्राचीन मंदिरों में ठाकुर जी का अभिषेक, राजभोग की रसोई और समस्त धार्मिक अनुष्ठान सदियों से यमुना जल से ही संपन्न होते आए हैं। किंतु, वर्तमान में यमुना के दूषित स्वरूप के कारण इन परंपराओं के निर्वहन में भारी कठिनाई आ रही है। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि विकास की योजनाएं यमुना की धारा में बाधक नहीं बननी चाहिए, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा प्राथमिक होनी चाहिए। पत्र के जरिये राष्ट्रपति से की अपील मीटिंग में मौजूद लोगों ने कहा कि राष्ट्रपति के वृंदावन प्रवास को देखते हुए समिति ने पत्र और मीडिया के माध्यम से उनसे विशेष अपील की है। समिति का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना को उनके मूल स्वरूप में बहाल कराया जाए। श्रद्धालु आज भी आस्था के वशीभूत होकर जहरीले जल से आचमन करने को मजबूर हैं, जो धार्मिक पीड़ा के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। यह रहे मौजूद बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ कि यमुना की निर्मलता के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों समेत केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा जाएगा। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार ब्रजवासियों की भावनाओं को समझते हुए ठोस कदम उठाएगी। इस दौरान समिति की महासचिव अनघा श्रीनिवासन, बिहारी लाल वशिष्ठ, राजेश पाठक, मनीष पारीक, रामकृष्ण दास, गोपाल कृष्ण गोस्वामी, आचार्य दीपक गोस्वामी, रजत गोस्वामी, जय किशोर गोस्वामी, गोपेश कृष्ण गोस्वामी, देव गोस्वामी, सोमनाथ गोस्वामी, लाल कृष्ण चतुर्वेदी, भगवत स्वरूप आदि वृंदावन के विभिन्न मंदिरों के सेवायत और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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