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पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र के रामनगर गांव में एक बुजुर्ग रामचंद्र को 60 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी जमीन का मालिकाना हक मिला, लेकिन प्रमाण पत्र मिलने के अगले ही दिन उनका निधन हो गया। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भूमिधरी का प्रमाण पत्र सौंपा था। मूल रूप से देवरिया जनपद के निवासी रामचंद्र को वर्ष 1960 में ‘पीलीभीत लखीमपुर खीरी पुनर्वासन योजना’ के तहत रामनगर गांव में आवासीय और कृषि योग्य भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि, उन्हें इस जमीन पर कानूनी रूप से मालिकाना हक (भूमिधरी का अधिकार) पाने के लिए दशकों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीलीभीत दौरे पर थे। उन्होंने अपने हाथों से रामचंद्र को भूमिधरी का प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस दौरान रामचंद्र और उनके परिवार के सदस्य भावुक हो गए। प्रमाण पत्र मिलने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था। घर लौटने पर सभी ने रामचंद्र को बधाई दी और इस ऐतिहासिक क्षण को साझा किया। मंगलवार तड़के रामचंद्र अपनी उसी जमीन और खेतों को देखने गए थे, जिसके अब वह आधिकारिक मालिक बन चुके थे। खेत से लौटकर घर पहुंचते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्होंने दम तोड़ दिया। गांव के लोग सजल आंखों से बस यही कह रहे हैं कि “शायद रामचंद्र की सांसें अपनी जमीन का मालिक बनने के इंतजार में ही टिकी हुई थीं। भगवान ने उनकी अंतिम इच्छा पूरी की और उन्हें अपने पास बुला लिया।”
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जमीन के मालिक बनते ही किसान की मौत:पीलीभीत में सोमवार को सीएम ने दिया था मालिकाना हक का प्रमाण पत्र