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बलिया के बेरुआरबारी क्षेत्र के करीहरा स्थित बाबा अमरनाथ एवं बाबा भगवान दास मंदिर परिसर में संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार रात कथा के पांचवें दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने सीता स्वयंवर की कथा का वर्णन किया। राजन जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जिसे जीवन में प्रभु से प्रेम हो जाता है, उसके जीवन में कभी पतझड़ नहीं आता, केवल वसंत ही वसंत रहता है। उन्होंने बच्चों को धार्मिक कथाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। महाराज जी ने पुष्प वाटिका में श्रीराम और लक्ष्मण के मनमोहक रूप का सखियों द्वारा किए गए वर्णन को विस्तार से बताया। उन्होंने धनुष यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि किस प्रकार ऋषि विश्वामित्र भगवान राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला पहुंचे। स्वयंवर में पहुंचे अहंकारी और बलशाली राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाए। तब विश्वामित्र जी की आज्ञा से प्रभु राम ने सरलता से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। यह देखकर राजा जनक अत्यंत प्रसन्न हुए और पूरे नगर में खुशियां फैल गईं। राजन जी महाराज ने बताया कि भगवान राम ने धनुष को केवल तोड़ा नहीं, बल्कि उसका ‘भंजन’ किया, ताकि अहंकार दोबारा खड़ा न हो सके। उन्होंने लक्ष्मण और परशुराम संवाद का वर्णन करते हुए प्रभु राम के धैर्य, ब्राह्मण के प्रति सम्मान, तर्क और वीरता के अद्भुत समन्वय को रेखांकित किया। कथा में उपस्थित श्रद्धालु पूरे ध्यान से कथा का श्रवण करते रहे और भजनों पर झूमते रहे। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस रामकथा में पहुंचकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
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बलिया में राजन जी महाराज ने सुनाई सीता स्वयंवर कथा:कहा- जिसे जीवन में प्रभु से प्रेम, उसके जीवन में कभी पतझड़ नहीं आता