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कानपुर में एक साइबर ठगी के मामले में मुख्य आरोपी इंटरनेशनल कंपनी के इंडिया कंट्री हेड की अग्रिम जमानत याचिका गुरुवार को खारिज हो गई। डीसीपी ने साइबर थाना प्रभारी की बेहतरीन पैरवी करने पर उन्हें और टीम को सराहा। उन्होंने बताया कि सुप्रीमकोर्ट तक के वकील अग्रिम जमानत याचिका के लिए बहस करने कोर्ट में पहुंचे थे, लेकिन पुलिस के तर्क के आगे दिग्गज वकीलों की दलीलें टिक नहीं सकी और कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। साक्ष्यों के आगे नहीं टिक सकी बचाव पक्ष की दलीलें डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बबताया कि कानपुर के साइबर थाने में मुकदमा अपराध संख्या-17/2026 से संबंधित है। इस मामले में साइबर ठगी के साथ ही धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य गंभीर धाराओं में ठगी करने वाले कंपनी के कंट्री हेड अक्षय खोडे, संदीप सकुनिया और हेमराम सकुनिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। साइबर थाना प्रभारी सतीश यादव ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि डीएसजीआरपी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से संचालित DS Live मोबाइल एप्लीकेशन के लिए क्लाउड एवं सर्वर सेवाएं Agora Inc. कंपनी के जरिए ली जा रही थीं। शिकायत के अनुसार, सह-अभियुक्तों द्वारा कथित रूप से एक फर्जी ई-मेल आईडी तैयार कर उसका उपयोग करते हुए DS Live एप्लीकेशन से संबंधित प्रशासनिक नियंत्रण एवं बिलिंग संरचना में अनधिकृत हस्तक्षेप किया गया। इतना ही नहीं, बिलिंग विवरणों में कथित रूप से हेरफेर कर लगभग ₹21 लाख की धनराशि का भुगतान वास्तविक सेवा प्रदाता के स्थान पर अन्य इकाई की ओर मोड़ दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि एप्लीकेशन से संबंधित डेटा एवं सर्वर एक्सेस का दुरुपयोग किया गया तथा सेवा बाधित करने और अतिरिक्त भुगतान हेतु दबाव बनाने का प्रयास किया गया। मामले की विवेचना के दौरान ई-मेल संचार, आईपीडीआर (IP Detail Records), केवाईसी अभिलेख, डिजिटल लॉग्स तथा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय को अवगत कराया गया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य अभियुक्त की कथित भूमिका की प्रथम दृष्टया पुष्टि करते हैं तथा मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच के लिए अभिरक्षात्मक पूछताछ आवश्यक है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों तथा प्रकरण की गंभीरता पर विचार करते हुए अभियुक्त अक्षय खोडे की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। साइबर थाना प्रभारी और उनकी टीम को डीसीपी ने सराहा केस की विवेचना कर रहे साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश चन्द्र यादव, ने बताया कि आरोपी ने अग्रिम जमानत याचिका में अपने बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का पैनल खड़ा किया था, लेकिन साक्ष्य इतने मजबूत थे कि आरोपी के बचाव पक्ष का तर्क टिक नहीं सका और कोर्ट ने आरोपी अक्षय खोडे की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी को जल्द ही अरेस्ट करके जेल भेजा जाएगा। डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने साइबर थाना प्रभारी और उनकी टीम को सराहा।
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साइबर-ठगी में कंट्री हेड की अग्रिम-जमानत खरिज:आरोपी के खिलाफ जांच में मिले डिजिटल साक्ष्य, पुलिस जल्द आरोपियों की करेगी अरेस्टिंग