गोंडा की 138 पंजीकृत कोचिंग के पास फायर एनओसी नहीं:डीआईओएस से मिली थी संचालन की अनुमति, जांच में खुलासा


लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद गोंडा में कोचिंग संस्थानों की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। फायर विभाग की पड़ताल में सामने आया कि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से पंजीकृत 138 कोचिंग संस्थानों में से किसी के पास भी फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। हैरानी की बात यह है कि फायर विभाग से अनुमति लिए बिना ही इन संस्थानों को संचालन की मंजूरी दे दी गई। विभागीय अधिकारी भी कैमरे पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि अधिकांश संस्थान अग्नि सुरक्षा के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते। इसके बावजूद भी गोंडा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा इन कोचिंग संस्थान को संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है अब फायर विभाग अधिकारी की जांच के बाद गोंडा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी हड़कंप मचा हुआ है। 46 संस्थान ही पंजीकृत पाए जांच में सामने आया कि ये सभी 138 संस्थान बिना किसी एनओसी के मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे थे। वर्तमान में, केवल 46 संस्थान ही पंजीकृत पाए गए हैं। फायर विभाग ने इन सभी कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी कर फायर एनओसी प्रस्तुत करने की मांग की है। नोटिस देकर चेतावनी दी एनओसी न होने की स्थिति में सभी आवश्यक शर्तों और मानकों को पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। फायर विभाग के उप निरीक्षक नितेश शुक्ला लगातार जिले के विभिन्न कोचिंग संस्थानों का दौरा कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ले रहे हैं। मानक पूरे न होने पर नोटिस देकर चेतावनी भी दी जा रही है। उप निरीक्षक शुक्ला ने बताया कि लखनऊ की घटना के बाद मुख्यालय से चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश मिले हैं। जांच के दौरान अधिकतर संस्थानों में मानक के अनुसार बिल्डिंग निर्माण नहीं पाया गया, जिससे आपातकालीन स्थिति में निकास और प्रवेश में दिक्कत हो सकती है। कमियों को दूर करने के लिए 15 दिन का समय फायर फाइटिंग व्यवस्था भी काफी हद तक संतोषजनक नहीं है। विभाग ने इन कमियों को दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। उप निरीक्षक शुक्ला ने स्पष्ट किया कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली 138 कोचिंग संस्थानों की सूची में से किसी ने भी फायर विभाग से एनओसी प्राप्त नहीं की है और न ही इसके लिए आवेदन किया है। एंट्री और एग्जिट एक ही गेट मिला ये सभी संस्थान बिना एनओसी के ही चल रहे हैं। अब मुझे यह नहीं पता है कि वह फायर का एनओसी कैसे दे सकते हैं हमारे यहां से ही दी जाती है वह ऑनलाइन होती है हमारे रिकॉर्ड में कहीं नहीं है। हमने अब तक जितनी भी जांच की है हमें एंट्री और एग्जिट एक ही गेट मिला है कोई सेकंड फ्लोर पर तो कोई फर्स्ट फ्लोर पर चल रहा है कोई घटना होने पर लोगों को समस्या हो सकती है। कोई अग्निकांड अगर हो जाता है तो आगे बड़ी घटना हो सकती है सभी लोगों को निर्देश दिया गया है कि दो एंट्री और दो एग्जिट गेट की व्यवस्था करें फायर फाइटिंग व्यवस्था है उसे भी ठीक किया जाए और फिर फायर विभाग को रिपोर्ट करें।

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