![]()
उन्नाव में मंगलवार रात सातवीं मोहर्रम के अवसर पर हज़रत क़ासिम के तख़्त का मातमी जुलूस पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। चौधराना मोहल्ले से शुरू हुए इस जुलूस में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के अकीदतमंद शामिल हुए। अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए नौहाख़्वानी और मातम किया। अंजुमन ए हुसैनिया के सदस्यों ने भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए नौहे पढ़े और सीना-ज़नी की। पूरे रास्ते “या हुसैन” की सदाओं से माहौल गमगीन बना रहा। मातमी जुलूस में शामिल अलम और ज़ुल्ज़नाह लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ अलम की ज़ियारत की और हज़रत क़ासिम की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस चौधराना मोहल्ले से रवाना होकर शहर के विभिन्न निर्धारित मार्गों से गुजरा। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने इसका स्वागत किया। यह जुलूस देर रात उन्नाव के ज़ेर खिड़की मोहल्ले में पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां अंतिम रस्में पूरी की गईं। मोहर्रम के इस मातमी जुलूस के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। जुलूस के मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी। गौरतलब है कि मोहर्रम के दिनों में शहर में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस, नौहाख़्वानी और अन्य मातमी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सातवीं मोहर्रम का यह तख़्त जुलूस भी इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Source link
उन्नाव में सातवीं मोहर्रम पर मातमी जुलूस:हज़रत क़ासिम के तख़्त के साथ नौहाख़्वानी, "या हुसैन" की सदाओं से गूंजा शहर