पैसे-नौकरी के लालच में जरूरतमंदों के डॉक्यूमेंट्स लिए, उनसे 27 फर्जी कंपनियां खोलीं और 25 बैंक अकाउंट से 3089 करोड़ रुपए निकाल लिए, ठगी करने वाले ये 2 शातिर भाई पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ के हैं। जिन्होंने सरकार को भी 108.49 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेड
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पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट(ED) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विस इंटेलिजेंस (DGGI) ने खुफिया जानकारी के तहत दोनों भाइयों अमित कुमार गोयल व मनीष कुमार का रिकॉर्ड खंगाला।
जिसमें पता चला कि इन्होंने मंडी गोबिंदगढ़ के ही एक अन्य कारोबारी गौरव अग्रवाल के साथ मिलकर एक ग्राम माल की डिलीवरी तक नहीं की और कागजों पर हजारों करोड़ का टर्नओवर खड़ा कर दिया। ज्यादातर सबूत उनके मोबाइल से मिले।
ED ने अब इस मामले में दोनों भाइयों समेत कुल पांच लोगों पर बाइनेम और बाकी अज्ञात लोगों पर लुधियाना के थाना जमालपुर में FIR दर्ज करवाई है। सगे भाईयों ने कैसे की ठगी, इसका पूरा खुलासा कैसे हुआ और अब तक क्या कार्रवाई हुई, पढ़िए, इसकी पूरी कहानी…

फर्जी बिलिंग और करोड़ों की कमाई:-
- जरूरतमंदों के KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग: ED ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दोनों भाई किस तरीके से फर्जी कंपनियां बना रहे थे। उन्होंने बताया कि अमित गोयल और मनीष कुमार ने आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब लोगों को निशाना बनाया। मामूली पैसों का लालच देकर या नौकरी लगाने के नाम पर उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज (KYC) हासिल कर लिए। अमित गोयल ने केवल दो कंपनियां अपने पैन पर बनाईं, जबकि बाकी की 25 कंपनियां इन लोगों के नाम पर दर्ज करा दी गईं।
- 720 करोड़ के फर्जी बिल जारी: कागजों पर खड़ी की गईं इन 27 शेल कंपनियों के जरिए देश की कई अन्य बड़ी लाभार्थी कंपनियों को फर्जी इनवॉइस यानि बिना माल की डिलीवरी के सिर्फ बिल जारी किए गए। इन बिलों की कुल कीमत 720.97 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की चोरी: शिकायत के अनुसार बिना माल खरीदे जो फर्जी बिल लाभार्थी कंपनियों को दिए गए थे, उनके आधार पर उन कंपनियों ने सरकार से 108.49 करोड़ रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर लिया। जो टैक्स सरकारी खजाने में जाना चाहिए था, वह इन कंपनियों ने आपस में बांट लिया।
- RTGS के जरिए लेयरिंग और APMC खातों का खेल: शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने यह दिखाने के लिए कि व्यापार पूरी तरह कानूनी है, लाभार्थी कंपनियां इन 27 फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में RTGS के जरिए पैसा ट्रांसफर करती थीं। इस पैसे को सीधे निकालने के बजाय, इसे अलग-अलग बैंक खातों में लेयरिंग में घुमाया जाता था। लास्ट में यह सारा पैसा APMC (कृषि उत्पाद बाजार समिति) के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। सिंडिकेट ने इसके लिए IDFC फर्स्ट बैंक की विभिन्न शाखाओं में 25 APMC खाते खोल रखे थे।
- TDS छूट का फायदा और कैश री-सर्कुलेशन: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N के तहत कृषि से जुड़े APMC खातों से नकद निकासी पर TDS और निकासी सीमा में विशेष छूट मिलती है। आरोपियों ने इसी कानूनी लूपहोल का फायदा उठाया और इन 25 खातों से बेरर चेक और अथॉरिटी लेटर के जरिए धड़ल्ले से 3089.57 करोड़ रुपए कैश निकाल लिया। इसके बाद अमित और मनीष अपना तय कमीशन काटते थे और बाकी का सारा कैश वापस उन्हीं लाभार्थी कंपनियों के मालिकों को सौंप देते थे। इस तरह ब्लैक मनी को पूरी तरह व्हाइट कर दिया गया।

आरोपी पकड़े कैसे गए, सिलसिलेवार जानिए…
- सस्पिशियस ट्रांजेक्शन इनपुट: बैंकों और वित्तीय खुफिया इकाइयों ने नोटिस किया कि कुछ खास बैंक खातों में अचानक हजारों करोड़ रुपए का लेन-देन हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इन सभी अलग-अलग खातों में पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी कॉमन (एक ही) थे। बैंकों ने देखा कि इन खातों से हर दिन मोटी रकम निकाली जा रही है, जिसके बाद बैंक ने इसकी गुप्त सूचना DGGI को दी गई।
- छापेमारी में फर्जी निकले रिकॉर्ड में दर्ज पते: DGGI लुधियाना जोनल यूनिट ने जब कागजों में दर्ज कंपनियों के पतों पर छापेमारी की, तो वहां जमीन पर कोई गोदाम या ऑफिस नहीं मिला। कंपनियां सिर्फ फाइलों में चल रही थीं। DGGI ने फिर मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी करके सर्च ऑपरेशन चलाया।
- पुख्ता डिजिटल और फिजिकल सबूतों की बरामदगी: सर्च के दौरान जांच एजेंसियों को घोटाले पर मुहर लगाने वाले पुख्ता सबूत मिले। अफसरों को 54 चेक बुक, 46 एटीएम, 11 पेन कार्ड व 5 वोटर कार्ड मिले। अफसरों ने शिकायत में कहा है इनमें से ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि उनके नाम से कंपनी खुली है, जबकि कुछ प्रूफ डमी थे। इसके अलावा उनके ठिकानों से सात जाली स्टैंप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और कच्चे बिल मिले।
- वॉट्सएप चैट और डिलीट डेटा रिकवरी: अफसरों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि डिजिटल डिवाइसेस के बैकअप और डिलीट किए गए डेटा को जब रिकवर किया गया, तो उसमें करोड़ों रुपए के फर्जी इनवॉइस और वॉट्सएप चैट मिले, जिससे साफ हो गया कि दोनों भाई दूसरों की पहचान का इस्तेमाल कर एक डमी साम्राज्य चला रहे थे।
- सीपी के आदेश पर दर्ज हुआ मामला: मामले की जांच करने वाले थाना जमालपुर के जांच अधिकारी गुरमीत सिंह ने बताया कि ईडी की तरफ से पुलिस कमिश्नर को शिकायत मिली थी। शिकायत में जिनके नाम से ठगी हुई है उनमें से कुछ एड्रेस जमालपुर थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के भी हैं। FIR दर्ज कर ली है और अब इसके आगे की कार्रवाई की जाएगी।


घोटाले में अब तक क्या क्या कार्रवाई हुई, जानिए….
- DGGI ने रेड कर दोनों भाइयों को पकड़ा: लुधियाना पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार DGGI को खुफिया तंत्र से इस फ्रॉड की जानकारी मिली तो उन्होंने ट्रैप लगा दिया। DGGI के अफसरों ने 2024 में दोनों भाइयों के इस शातिर खेल को पकड़ लिया और नौ अक्तूबर 2024 को रेड करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
- दोनों भाई 9 महीने जेल में रहे: दोनों भाई लगभग 9 महीने जेल में रहे। इसके बाद दोनों आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को नियमित जमानत पर रिहा किया गया। अदालत ने उनकी आवाजाही पर कई कड़ी शर्तें लगाई हैं।
- कारण बताओ नोटिस जारी किया: शिकायत के अनुसार DGGI लुधियाना ने 21 फरवरी 2025 को आरोपियों और उनकी फर्मों को एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस जारी कर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की और इसकी परतें खोलनी शुरू की।
- ED के सामने गुनाह कबूला: ED के अफसरों का दावा है कि अमित कुमार गोयल ने स्वीकार किया कि वह साल 2018 से एक सक्रिय ‘एंट्री ऑपरेटर’ के रूप में काम कर रहा था, जो बिना माल की सप्लाई के सिर्फ बिल बेचता था और कमीशन काटकर नकदी वापस करता था।
- जमालपुर थाने में ताजा FIR दर्ज: ED के सहायक निदेशक सूरज कुमार यादव ने लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को इस मामले में एक शिकायत दी। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने थाना जमालपुर पुलिस को इस मामले में FIR दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने FIR में धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 और 471 लगाई गई हैं। FIR में अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल (बाबा बालक नाथ और जेएसजी स्टील रोलिंग मिल्स से जुड़ा), गुरदीप सिंह (मेसर्स सिंह ट्रेडिंग कंपनी) और बलवंत सिंह (मेसर्स बलवंत एंड संस) के नाम शामिल किए हैं।

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