नाबालिग से दुष्कर्म मामले में हस्तक्षेप से किया इंकार:बिजनौर का मामला, कोर्ट ने कहा उम्र और मेडिकल रिपोर्ट ट्रायल का विषय


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी लईक की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायिक हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति विकास की एकलपीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों की जांच का कार्य ट्रायल कोर्ट का है, उच्च न्यायालय का नहीं। बिजनौर जिले के थाना श्योहरा में हुई घटना की एफआईआर पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई थी। जानिये क्या है मामला आरोप है कि 17 दिसंबर 2025 को सुबह 8:30 बजे 17 वर्षीय पीड़िता जब स्कूल जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी, तभी आरोपी एक साथी के साथ कार में आया और उसे जबरदस्ती गाड़ी में बैठाकर पहले एक होटल ले गया और बाद में श्योहरा में दुष्कर्म किया। आरोपी के वकील ने दलील दी कि अस्थि परीक्षण में पीड़िता की आयु 18 वर्ष से अधिक पाई गई, इसलिए पाक्सो अधिनियम लागू नहीं होता। साथ ही अगले दिन हुई चिकित्सीय जांच में कोई असामान्यता नहीं मिली। न्यायालय ने पाक्सो अधिनियम की धारा 29 का हवाला देते हुए कहा कि जब तक विपरीत साबित न हो, आरोपी को अपराध का दोषी माना जाएगा और यह सिद्ध करना ट्रायल के दौरान ही संभव है। अदालत ने कहा कि पीड़िता की उम्र और मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े सवाल ट्रायल का विषय हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को ट्रायल में अपने सभी कानूनी व तथ्यात्मक आधार रखने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *