पीलीभीत वेतन घोटाला: निलंबित कर्मचारी पर फिर जांच शुरू:15 दिन में जवाब मांगा, सेवा समाप्ति की चेतावनी दी


पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय में हुए करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले के मुख्य आरोपी निलंबित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच नए सिरे से शुरू होगी। पूर्व में गठित जांच समिति के सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर जांच से हटने के बाद, अब एक नई तीन सदस्यीय विशेष समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। बीसलपुर जनता इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रवीण सक्सेना ने निलंबित कर्मचारी इल्हाम उर रहमान शम्सी को डाक के माध्यम से विस्तृत आरोप पत्र भेजा है। इस आरोप पत्र में बिंदुवार गंभीर आरोप तय किए गए हैं और आरोपी कर्मचारी से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बिना किसी देरी के सीधे सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह पूरा मामला डीआईओएस कार्यालय में संबद्ध रहने के दौरान इल्हाम उर रहमान शम्सी पर वेतन बिलों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये के गबन के आरोप से जुड़ा है। इस महाघोटाले का भंडाफोड़ होने पर तत्कालीन डीआईओएस राजीव सिंह ने कोतवाली सदर में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी इल्हाम और उसके कुछ करीबियों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वे जेल भी जा चुके हैं। प्रधानाचार्य प्रवीण सक्सेना ने बताया, “उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पहले जो जांच टीम बनाई गई थी, उसके सदस्यों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। हालांकि, जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। जल्द ही नई तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर मामले की निष्पक्ष व नए सिरे से जांच कराई जाएगी।” शासन स्तर से मिल रहे कड़े निर्देशों के अनुपालन में अब विभागीय स्तर पर भी आरोपी कर्मचारी पर शिकंजा कसना पूरी तरह तय माना जा रहा है।

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