![]()
लखनऊ में पितृ दिवस की पूर्व संध्या पर सुषमा अनिल फाउंडेशन ने एक सांस्कृतिक संध्या ‘पिता तुझे सलाम’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम शनिवार को गोमती नगर स्थित भारतीयम् भवन में हुआ, जिसमें संगीत, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का सुंदर संगम देखने को मिला। साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत फाउंडेशन की संयोजिका अंकिता ने अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय अनिल पाण्डेय को पुष्पांजलि अर्पित कर की। इसके बाद, फाउंडेशन की संरक्षिका सुषमा पाण्डेय ने लोकप्रिय गायिका मांडवी तिवारी और पर्यावरण विशेषज्ञ संदीप बिसारिया का माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया। मांडवी तिवारी ने देशभक्ति गीत गाए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गणपति वंदना “सखी मंगल गाओ री” से हुई। इसके बाद “राम आएंगे” भजन और पिता को समर्पित भावपूर्ण गीत ‘उजाला जगत का जिनसे मिला…’ ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। गायिका मांडवी तिवारी ने देशभक्ति गीत “ऐ मेरे प्यारे वतन”, लोकगीत “पटना से बैदा बुलाई द”, “कहे तोसे सजना” और गजल “जाने किस बात की वो मुझको सजा देता है” प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। तबले पर विनय कुमार यादव ने प्रभावी संगत दी। फाउंडेशन की सचिव अंकिता ने बताया कि उनके दिवंगत पिता स्वर्गीय अनिल पाण्डेय ने वर्ष 1990 से वाराणसी के राम प्यारी इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में सेवाएं दी थीं। उन्होंने बालिका शिक्षा, सर्व शिक्षा अभियान और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। वर्ष 2005 में उनके निधन के बाद भी उनके विचार लोगों को प्रेरित करते रहे हैं। यह आयोजन भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक अंकिता ने यह भी बताया कि फाउंडेशन अब लखनऊ में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सामाजिक आयोजनों की एक श्रृंखला शुरू कर रहा है। इससे पहले, संस्था वाराणसी में सुंदरकांड, जागरण, दान और भंडारों का आयोजन करती रही है। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना, शुभ्रा, अनिल दीपक, रत्ना आनंद, अगम्या, पावनी नमन, नीलम गुप्ता, रश्मि गुप्ता, रीता मनराल, अनुजा पाण्डेय, बबीता साहू, कल्पना शर्मा, पिंकी मिश्रा और राष्ट्रीय सनातन समिति के संयोजक लक्ष्मण गौड़ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
Source link
लखनऊ में 'पिता तुझे सलाम' कार्यक्रम:संगीत और संस्कृति के बीच पिता को दी गई श्रद्धांजलि