Kanpur LPS Cardiology NABH Certified

दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुरकुछ ही क्षण पहले

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उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के इतिहास में एक बहुत बड़ी कामयाबी जुड़ी है। कानपुर के एलपीएस (LPS) इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी को देश में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा मानक माने जाने वाले ‘नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स’ यानी NABH का सर्टिफिकेट मिल गया है।

इस सर्टिफिकेट के मिलते ही यह संस्थान उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में पहला ऐसा ‘अंग-विशिष्ट’ (सुपर स्पेशलिटी) अस्पताल बन गया है, जिसने इलाज की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के राष्ट्रीय मानकों को पूरा किया है। आसान शब्दों में कहें, तो अब यहां मरीजों को कॉरपोरेट अस्पतालों की तरह सुरक्षित और वर्ल्ड क्लास इलाज मिलेगा।

क्या है यह सर्टिफिकेट और क्यों है इतना खास?

NABH सर्टिफिकेट देश में किसी भी अस्पताल के इलाज, वहां की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा की गारंटी माना जाता है। इसे हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए अस्पताल को कई कड़े टेस्ट और मानकों से गुजरना पड़ता है।

कानपुर कार्डियोलॉजी को यह सर्टिफिकेट मरीजों की बेहतर देखभाल, इंफेक्शन कंट्रोल (संक्रमण रोकने के इंतजाम), दवाओं के सही मैनेजमेंट, इमरजेंसी सेवाओं की मुस्तैदी, साफ-सफाई, बायो-मेडिकल वेस्ट के सही निपटारे और फायर सेफ्टी जैसे कड़े पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद दिया गया है।

50 सालों का भरोसा, 51 जिलों के मरीजों को राहत

साल 1975 में स्थापित हुआ यह अस्पताल पिछले पांच दशकों से यूपी का सबसे बड़ा दिल का अस्पताल बना हुआ है। सरकार ने इसे 2005 में ही ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ घोषित कर दिया था। आज के समय में इस संस्थान पर सिर्फ कानपुर ही नहीं, बल्कि यूपी के करीब 51 जिलों और पड़ोसी राज्यों के लाखों मरीजों के दिल को धड़काने की जिम्मेदारी है। इस सर्टिफिकेट के बाद मरीजों का अस्पताल पर भरोसा और मजबूत होगा।

पिछले एक साल से चल रही थी तैयारी

इस बड़ी सफलता की नींव साल 2025 में संस्थान के डायरेक्टर प्रो. राकेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में रखी गई थी। अस्पताल को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए पिछले कई महीनों से बैकस्टेज भारी काम चल रहा था।

सभी विभागों के लिए काम करने के नए और सुरक्षित नियम (SOPs) बनाए गए। मरीजों की पहचान का सिस्टम मजबूत किया गया ताकि इलाज में कोई चूक न हो। डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई, जिसका नतीजा आज सबके सामने है। पूरी टीम की मेहनत रंग लाई अस्पताल के डायरेक्टर प्रो. राकेश कुमार वर्मा ने इस कामयाबी का श्रेय डॉक्टरों, नर्सों और पूरी प्रशासनिक टीम को दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं है, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज देने का हमारा वादा है।

इस पूरे मिशन को कामयाब बनाने में कार्डियोलॉजी के हेड प्रो. उमेश्वर पाण्डेय, कार्डियक एनेस्थीसिया की हेड प्रो. माधुरी प्रियदर्शी, सीवीटीएस के हेड प्रो. नीरज कुमार और प्रशासनिक टीम के डॉ. अमरजीत मित्रा, डॉ. हर्षित वर्मा व डॉ. संचया विभूति सहित पूरी टीम ने रात-दिन एक कर काम किया।

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