![]()
राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने बुधवार को राज्यसभा में उच्चतम न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह मांग पिछले 50 वर्षों से लंबित है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों वादकारियों को न्याय पाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। डॉ. बाजपेयी ने सदन में कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत वादकारी के हित को सर्वोच्च रखते हुए सस्ता, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने उपसभापति के माध्यम से केंद्र सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों, जनसंख्या और क्षेत्रफल को आधार बनाया जाए तो मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर में चार हाईकोर्ट बेंच स्थापित की जानी चाहिए। उनका कहना था कि इन चार बेंचों के गठन के बाद भी उत्तर प्रदेश में क्षेत्रफल, आबादी और लंबित मुकदमों का दबाव देश में सबसे अधिक रहेगा, इसलिए न्यायिक ढांचे का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही इस मांग को अब पूरा किया जाना चाहिए ताकि लोगों को अपने क्षेत्र के निकट न्याय मिल सके। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने उपसभापति के माध्यम से केंद्रीय मंत्री से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे आम लोगों को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य को मजबूती मिलेगी।
Source link
डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने उठाई हाईकोर्ट बेंच की मांग:मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर में बेंच बनाने का दिया सुझाव