लखनऊ केजीएमयू कार्यशाला में शामिल हुए ब्रजेश पाठक:बोले- पांच साल पुराने मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोला जाएगा , टीम वर्क से मरीज होते है ठीक


लखनऊ के केजीएमयू में कार्यशाला का आयोजन। अटल बिहारी वाजपेई सांइटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी केयर रोडमैप फॉर ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क विषय पर आयोजित कार्यशाला में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक शामिल हुए । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों के एमबीबीएस डॉक्टरों को ट्रॉमा केयर में दक्ष बनाने के लिए छह माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। इस प्रशिक्षण को डिप्लोमा या सर्टिफिकेट के रूप में मान्यता देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि डॉक्टरों की विशेषज्ञता को औपचारिक पहचान मिल सके। टीम वर्क से मरीज होता है ठीक डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए। क्योंकि ट्रॉमा केयर में पूरी टीम की भूमिका अहम होती है। सभी के समन्वय से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है। डिप्टी सीएम ने कहा कि डॉक्टर अपने दायित्वों को समझें। मरीज को परिवार के सदस्य की तरह मानकर इलाज करें। उन्होंने कहा कि केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि सहानुभूति और संवेदनशील व्यवहार भी मरीज के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘मरीजों के लिए सिम्पैथी भी जरूरी’ डिप्टी सीएम ने कहा आयुर्वेद, होम्योपैथिक और एलोपैथिक उपचार के साथ सिम्पैथी भी मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि भले ही सभी की जिम्मेदारियां अलग-अलग हों, लेकिन मकसद एक ही है, मरीज की जान बचाना और उसे बेहतर इलाज देना। इससे प्रदेश की ट्रॉमा केयर व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, नीति आयोग के सदस्य डॉ. बीके पाल, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद मौजूद रही।

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