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प्रयागराज के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में आयोजित 30 दिवसीय ग्रीष्मकालीन बाल रंगमंचीय कार्यशाला का समापन गुरुवार को हुआ। इस अवसर पर देशभक्ति से ओतप्रोत नाटक ‘मिशन वंदे मातरम्’ का मंचन किया गया। केंद्र के प्रेक्षागृह में 8 से 12 वर्ष के बाल कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजेंद्र प्रताप, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी, डायट प्रयागराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय भी उपस्थित रहे। नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी प्रत्युष वर्सने ने किया, जबकि आकाश अग्रवाल सहायक प्रशिक्षक थे। ‘मिशन वंदे मातरम्’ नाटक की कहानी वर्तमान समय के बच्चों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ती है। इसमें कुछ बच्चे खेल-खेल में एक रहस्यमयी टाइम मशीन के जरिए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौर में पहुंच जाते हैं। वहां उनकी मुलाकात भोलू और कमला नामक बच्चों से होती है, जिनके भाई को अंग्रेज पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। सभी बच्चे मिलकर अपनी सूझबूझ और साहस से अंग्रेजों को चकमा देकर उसे आजाद कराने में सफल होते हैं। नाटक के अंतिम दृश्य में जब मंच पर तिरंगा फहराया गया और “वंदे मातरम्” के नारे गूंजे, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। देशभक्ति के साथ-साथ नाटक में हास्य का भी पुट था। ब्रिटिश अधिकारी इंस्पेक्टर पिंपल और हवलदार डंडा के हास्यपूर्ण किरदारों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। नाटक में ईवा राज, मनश्वी राज सिंह, ईशा देव, कृतिका, आराध्या सरगम, अम्बिका, नित्या जायसवाल, दिवा त्रिपाठी, गर्वित धानी, राजश्री मौर्य, कौस्तुभ चौबे, वेदांश पटेल, प्रणीत खरे, अनमोल, प्रथम शुक्ल और आयज़ा फरोग अहमद सहित कई बाल कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय किया। समापन अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने कहा कि रंगमंच बच्चों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है।
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NCZCC में बाल रंगमंचीय कार्यशाला का समापन:'मिशन वंदे मातरम्' नाटक से बच्चों ने जगाई देशभक्ति