बस्ती में निजीकरण के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू:अधिवक्ताओं और स्टाम्प विक्रेताओं ने सरकार पर रोजगार छीनने का आरोप लगाया


बस्ती में अधिवक्ताओं, स्टाम्प विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों ने निजीकरण के विरोध में गुरुवार को अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह प्रदर्शन रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में हो रहा है। प्रदर्शनकारी सरकार की निजीकरण नीति को रोजगार विरोधी बता रहे हैं और इसे तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं। धरने को संबोधित करते हुए जनपद बार के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विधि एवं मानवाधिकार कांग्रेस के मंडल अध्यक्ष ने सरकार पर उद्योगपतियों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां आम लोगों के हितों के विपरीत हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी सेवाओं के लगातार निजीकरण से युवाओं और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को बेरोजगार करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। लाखों लोगों की आजीविका होगी प्रभावित वक्ताओं ने बताया कि स्टाम्प विक्रेता, दस्तावेज लेखक और अधिवक्ता वर्षों से पंजीकरण एवं न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कार्यों का संचालन कर रहे हैं। निजीकरण लागू होने पर इस व्यवस्था से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की। धरने में शामिल अधिवक्ताओं और स्टाम्प विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर विचार कर निजीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने इसे अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा की लड़ाई बताया। इस धरने में जगदीश चौधरी, एडवोकेट अरविंद मिश्रा, संजय श्रीवास्तव, विनोद सिंह, राकेश श्रीवास्तव, डॉ. शुक्ल, कुलदीप चौधरी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, स्टाम्प विक्रेता और दस्तावेज लेखक उपस्थित रहे। सभी ने निजीकरण का विरोध करते हुए सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

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