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नोएडा के यथार्थ अस्पताल में खिलौने बैटरी निगलने का एक केस सामने आया। केमिकल रिएक्शन से 10 महीने युवराज की हालत बिगड़ गई। उसकी तीन घंटे तक सर्जरी की गई। जिससे उसकी जान बची। डॉक्टर ने बताया कि बैटरी के कारण बच्चे की भोजन नली (इसोफेगस) और श्वासनली (ट्रेकिया) को गंभीर क्षति पहुंची थी। क्या थी परेशानी, फैला इंफेक्शन
युवराज को लगातार खांसी और दूध पीते समय बार-बार सांस रुकने जैसी शिकायतों के बाद यथार्थ हॉस्पिटल लाया गया। जांच में गर्दन के हिस्से में एक गोलाकार वस्तु फंसी हुई मिली। आपातकालीन एंडोस्कोपी के दौरान डॉक्टरों ने पुष्टि की कि यह एक बटन बैटरी थी, जो बच्चे की भोजन नली में फंसी हुई थी।
जांच में सामने आया कि बैटरी के रासायनिक प्रभाव से भोजन नली और श्वासनली के बीच असामान्य मार्ग (ट्रेकियो-इसोफेगल कम्युनिकेशन) बन गया था। दो महीने इलाज फिर सर्जरी
करीब दो महीने के उपचार और लगातार निगरानी के बावजूद यह जटिलता बनी रही, जिसके बाद डॉक्टरों ने पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी का निर्णय लिया। करीब तीन घंटे तक चली इस सर्जरी में भोजन नली को श्वासनली से सावधानीपूर्वक अलग किया गया और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई। यह सर्जरी सर्जन डॉ. जय भारत पंवार ने की।
डॉ. जय भारत पंवार ने कहा, “बटन बैटरी निगलना बच्चों में होने वाली सबसे खतरनाक आपातकालीन स्थितियों में से एक है। यह कुछ ही घंटों में भोजन नली और आसपास के ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। युवराज के मामले में बैटरी ने भोजन नली और श्वासनली दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया था, जिससे सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी।
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