भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को किया कलंकित:दोषी निक्कू चौधरी के लिए आगरा कोर्ट ने की टिप्पणी, कहा दहशत फैलाने की भी थी मंशा


“अभियुक्त ने केवल अपनी बहन की हत्या नहीं की, बल्कि संपत्ति के लालच में भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया। उसने अपने कृत्य से यह संदेश देने का प्रयास किया कि जो उसके खिलाफ जाएगा, उसका यही अंजाम होगा। जिस प्रकार उसने अपनी बहन की हत्या की, उससे स्पष्ट है कि वह मानवता के दायरे से बाहर निकल चुका है।” आगरा एडीजे-5 मृदुल दुबे की अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए बहन की हत्या और भाभी पर जानलेवा हमले के दोषी ललित चौधरी उर्फ निक्कू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का मानते हुए आरोपी पर 4.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इस मामले में घायल भाभी और प्रत्यक्षदर्शी गवाह नीलू चौधरी की गवाही अभियोजन पक्ष की सबसे अहम कड़ी साबित हुई, जिसे अदालत ने फैसले का महत्वपूर्ण आधार माना। दुकान और किराए के विवाद में हुई थी वारदात मामला शाहगंज क्षेत्र के जोगीपाड़ा स्थित देवी मार्केट का है। अभियोजन के अनुसार परिवार में दुकान और संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोपी ललित चौधरी उर्फ निक्कू विवादित दुकान का किराया करीब 11 महीने से स्वयं रख रहा था और भाभी नीलू चौधरी को उनका हिस्सा नहीं दे रहा था। 26 नवंबर 2022 को नीलू चौधरी अपनी ननद पूनम चौधरी के साथ हिस्से की दुकान पर ताला लगाने पहुंचीं। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और आरोपी ने दोनों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। फायरिंग में पूनम चौधरी को कई गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नीलू चौधरी के हाथ में गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल भाभी बनीं मुकदमे की सबसे मजबूत गवाह घटना के समय नीलू चौधरी मौके पर मौजूद थीं और उन्होंने पूरी वारदात अपनी आंखों से देखी थी। गोली लगने के बावजूद उन्होंने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। अभियोजन के अनुसार आरोपी की ओर से मिली धमकियों के कारण उनकी गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराई गई। अदालत ने अपने फैसले में उनकी गवाही को विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम पर भी किया था फायर घटना के दो दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। 28 नवंबर 2022 को उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 30 एमएम पिस्टल बरामद की गई। पुलिस के अनुसार बरामदगी के दौरान आरोपी ने तत्कालीन शाहगंज थाना प्रभारी जसवीर सिंह सिरोही पर भी जान से मारने की नीयत से फायर कर भागने का प्रयास किया था। हालांकि गोली मिस हो गई और पुलिस अधिकारी बाल-बाल बच गए। इस मामले में भी आरोपी के खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया था। बचाव पक्ष ने दो अन्य लोगों पर जताया संदेह सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने साधना श्रीवास्तव और लखन गोस्वामी को गवाह के रूप में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय आरोपी और उसका परिवार मौके पर नहीं था तथा दो अन्य लोगों को हथियार लेकर भागते देखा गया था। हालांकि अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। कोर्ट ने कहा- समाज में भय का संदेश देने वाला अपराध फैसले में अदालत ने कहा कि यह केवल हत्या का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा अपराध है जो समाज में भय और मनोवैज्ञानिक आतंक का संदेश देता है। दोषी ने अपनी सगी बहन की निर्मम हत्या कर रिश्तों की मर्यादा को तार-तार किया और यह संदेश देने का प्रयास किया कि उसके विरोध का परिणाम घातक हो सकता है। ऐसे मामलों में कठोरतम दंड ही न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति कर सकता है। यह हुई सजा अदालत ने ललित चौधरी उर्फ निक्कू को हत्या के मामले में मृत्युदंड, हत्या के प्रयास के मामले में आजीवन कारावास, आयुध अधिनियम के एक मामले में आजीवन कारावास तथा दूसरे मामले में सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कुल 4 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए। कोर्ट की अहम टिप्पणी “अभियुक्त ने संपत्ति के लालच में अपनी बहन की बेरहमी से हत्या कर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है। उसने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जो उसके खिलाफ जाएगा, उसका यही परिणाम होगा। जिस प्रकार अपराध किया गया, उससे स्पष्ट है कि अभियुक्त मानवता के दायरे से बाहर निकल चुका है। उसका कृत्य विरल से विरलतम श्रेणी में आता है।”

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