रोजगार सेवकों का 36 महीने का मानदेय बकाया:सहारनपुर में प्रदर्शन, सरकार से घोषणाएं लागू करने की मांग


सहारनपुर में सोमवार को ग्राम रोजगार सेवक संघ ने लंबित मानदेय, ईपीएफ भुगतान और अन्य मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। संघ के जिलाध्यक्ष घनश्याम सिंह राणा के नेतृत्व में रोजगार सेवकों ने कलक्ट्रेट पर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों रोजगार सेवक लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष घनश्याम सिंह राणा ने बताया कि मनरेगा योजना को लागू करने में ग्राम रोजगार सेवकों की अहम भूमिका है। इसके बावजूद, सहारनपुर जनपद में कई रोजगार सेवकों का 36 महीने तक का मानदेय लंबित है। उन्होंने कहा कि प्रतिमाह मिलने वाला मात्र 7788 रुपये का मानदेय भी समय पर नहीं मिल रहा, जिससे परिवार चलाने, बच्चों की फीस भरने और इलाज कराने में गंभीर परेशानियां आ रही हैं। राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग राणा ने यह भी बताया कि 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में मुख्यमंत्री ने रोजगार सेवकों के लिए एचआर पॉलिसी, मानदेय वृद्धि, अवकाश और अनुकंपा नियुक्ति सहित कई घोषणाएं की थीं। हालांकि, इन घोषणाओं को आज तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। रोजगार सेवकों ने मांग की है कि सभी लंबित मानदेय का भुगतान तत्काल किया जाए और ईपीएफ की राशि उनके खातों में जमा कराई जाए। संघ ने अपनी मांगों में मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने, एक अलग बजट व्यवस्था लागू करने, उच्च गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन और सीयूजी सिम उपलब्ध कराने की बात कही। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने और 19 वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग की। रोजगार सेवकों ने बताया कि मनरेगा में लगातार तकनीकी व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। उन्होंने कहा कि फेस स्कैन और ऑनलाइन हाजिरी जैसी प्रक्रियाओं में मोबाइल की कमी और तकनीकी खामियों के कारण मजदूरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घनश्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश के लगभग 40 हजार रोजगार सेवक सरकार की योजनाओं को सफल बनाने में लगातार सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।

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