मैनपुरी के जमतरी गांव में चुनाव बहिष्कार का ऐलान:जल निकासी की समस्या से नाराज हैं, ग्रामीणों ने कहा- वोट नहीं देंगे


मैनपुरी के भोगांव तहसील क्षेत्र के जमतरी गांव के ग्रामीणों ने आगामी चुनावों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। उनका आरोप है कि गांव में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह समस्या हल नहीं होती, वे मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में नालियों और पानी निकासी की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे गलियों में पानी भर जाता है और लोगों का आवागमन बाधित होता है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने गांव में प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ‘जल निकासी नहीं तो वोट नहीं’ और ‘समस्या का समाधान नहीं, तो मतदान नहीं’ जैसे नारे लगाए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद गांव की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते। गांव के निवासी अरुण कुमार ने बताया कि पूरे गांव में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने मांग की कि इस जलभराव को गांव से बाहर निकाला जाए, क्योंकि इससे बीमारियां फैल रही हैं। कुमार ने यह भी बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों को इसी जलभराव से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यह समस्या पिछले दो से तीन सालों से बनी हुई है। रामावतार सिंह ने बताया कि पूरे रास्ते पर पानी भरा हुआ है और जो नाला खुदवाया गया था उसे पर भी रोक लगवा दी गई। उन्होंने बताया कि जल निकासी की व्यवस्था है नहीं है, जिस वजह से रोड पर पानी निकाल दिया जाता है, जिसके कारण पूरे गांव में जल भराव जैसी स्थिति बनी हुई है। बीमारियों से लेकर अन्य कहीं समस्याएं हो रही है। उनका कहना है कि आसपास के कई गांवों में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन उनके गांव की बुनियादी समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि वे इस बार किसी भी राजनीतिक दल के वादों पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने दोहराया कि जब तक गांव में जल निकासी सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे मतदान प्रक्रिया से दूर रहेंगे।

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