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कानपुर के सुप्रसिद्ध जेके मंदिर में आज का नजारा बेहद खास और दिव्य रहा। मंदिर में विराजमान राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण का ऐसा अलौकिक श्रृंगार किया गया कि जो भी भक्त दर्शन करने पहुंचा, उसकी आंखें बस प्रभु के इस स्वरूप को निहारती ही रह गईं। भीषण गर्मी के इस मौसम में ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से हल्के रंगों के वस्त्रों का चयन किया गया था। श्रृंगार के बाद जब मंदिर के कपाट खुले और महाआरती शुरू हुई, तो पूरा परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयकारों से गूंज उठा। इस अद्भुत पल का साक्षी बनने के लिए शहर के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। क्रीम और पीले रंग की पोशाक में दिव्य रूप इस बार ठाकुर जी और राधा रानी को बेहद खास और आरामदायक पोशाक धारण कराई गई। दोनों विग्रहों को हल्के पीले और क्रीम रंग के वस्त्र पहनाए गए थे। यह पोशाक महीन जाल और आकर्षक लेस के काम से तैयार की गई थी, जिस पर बेहद सुंदर और पारंपरिक कढ़ाई उभर कर आ रही थी। श्री राधा रानी ने सुंदर लहंगा और ओढ़नी धारण की थी। उनके मस्तक पर चमचमाता स्वर्ण मुकुट और गले में कई लड़ियों वाले मोतियों व कीमती रत्नों के हार उनके दिव्य और शांत स्वरूप को और ज्यादा बढ़ा रहे थे। वहीं दूसरी ओर, भगवान श्री कृष्ण अपनी चिर-परिचित त्रिभंग मुद्रा में हाथों में बांसुरी थामे खड़े थे। उनके सिर पर हरे और पीले रंग का पगड़ी-मुकुट सजा था, जिसके ऊपर लगा मोरपंख हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था। चांदी के सिंहासन पर गेंदे के फूलों की महक मंदिर के गर्भगृह को भी आज बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। विग्रहों के पीछे लाल और सुनहरे रंग का भारी कढ़ाई वाला पर्दा लगाया गया था, जिससे क्रीम रंग की पोशाक और ज्यादा खिलकर दिख रही थी। भगवान चांदी के भव्य सिंहासन और बारीक नक्काशी वाले मेहराब के बीच विराजमान थे। दोनों मुख्य विग्रहों को चांदी के खिले हुए कमल के आसन पर स्थापित किया गया था। प्रभु के गले में पीले और नारंगी गेंदे के फूलों की लंबी-लंबी मालाएं सुशोभित थीं, जिससे पूरा गर्भगृह महक उठा। चांदी की गायों और उत्सव मूर्ति के भी हुए दर्शन
मुख्य विग्रहों के ठीक नीचे सामने की तरफ छोटे विग्रह यानी उत्सव स्वरूप भी विराजमान थे। उन्हें भी बड़े विग्रहों की तरह ही समान रंग की पोशाक और फूलों से सजाया गया था। उत्सव मूर्ति के पीछे हाथ जोड़े खड़े गरुड़ जी की चांदी की छोटी मूर्ति भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, सबसे नीचे दाईं और बाईं ओर रखीं चांदी की छोटी गाएं भगवान श्री कृष्ण के ब्रज स्वरूप और उनकी गऊ-सेवा की याद दिला रही थीं। क्यों खास है यह श्रृंगार?
मंदिर के पुजारी के मुताबिक, ऋतु परिवर्तन और ग्रीष्मकाल को देखते हुए ठाकुर जी को शीतलता देने के लिए ऐसे हल्के रंगों और फूलों का उपयोग किया जाता है। यह रूप न सिर्फ शास्त्रों के अनुसार है, बल्कि भक्तों की आंखों और मन को भी असीम शांति और ठंडक पहुंचाता है।
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गर्मी में ठाकुर जी को दी शीतलता:हल्के पीले रंग की पोशाक में सजे राधारानी और श्रीकृष्ण, अलौकिक रूप देख निहाल हुए भक्त