शाहजहांपुर3 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

शाहजहांपुर में सेना के संवेदनशील कैंट क्षेत्र में ब्रिगेडियर की वर्दी पहनकर घूम रहे 21 वर्षीय युवक को सेना ने पूर्व सैनिकों की मदद से पकड़ लिया। युवक खुद को सेना का ब्रिगेडियर बताता था और उसकी कार पर आर्मी हेडक्वार्टर का झंडा तथा सैन्य पहचान चिन्ह लगे मिले। देर रात सेना की शिकायत पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस को सौंप दिया गया।
पूछताछ में बताया कि सेना में उच्च पद पर पहुंचने का सपना पूरा न होने के बावजूद उसका जुनून कम नहीं हुआ। ब्रिगेडियर बनने का सपना उसका और उसकी मां दोनों का था। इसी कारण उसने जनवरी में वर्दी खरीदकर खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर घूमने लगा।

शुक्रवार दोपहर सेना के अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने एक युवक को फर्जी ब्रिगेडियर बनकर घूमते हुए पकड़ा था। आरोपी की पहचान रोजा थाना क्षेत्र के दुर्गा एन्क्लेव निवासी 21 वर्षीय आर्यन वर्मा के रूप में हुई है। देर रात नायब सूबेदार अमित कुमार की तहरीर पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस को सौंप दिया गया।
पिछले करीब दो महीनों से एक युवक सेना के वरिष्ठ अधिकारी की वर्दी पहनकर इलाके में घूम रहा था। इसकी सूचना मिलने के बाद स्टेशन मुख्यालय शाहजहांपुर के प्रशासनिक अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने उसे पकड़ने की योजना बनाई। इसी रणनीति के तहत उसे शहीद संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बुलाया गया, जहां पूछताछ के दौरान वह अपने दावों के समर्थन में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।


परिवार को बताया- उसका सेना में चयन हो गया
जांच में उसके पास से एक टाटा हैरियर कार बरामद हुई, जिस पर वन-स्टार प्लेट और एएचक्यू (आर्मी हेडक्वार्टर) का झंडा लगा था। इसके अलावा एक नकली पिस्तौल, सैन्य अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली छड़ी और कई फर्जी दस्तावेज भी मिले। उसके पास मौजूद पहचान पत्र भी जांच में नकली पाए गए।
पुलिस के अनुसार, आर्यन ने अपने परिवार को बताया था कि उसका सेना में चयन हो चुका है और उसे वर्दी भी आवंटित कर दी गई है। इसके बाद वह लगातार सैन्य अधिकारी की वर्दी पहनकर घूमता रहा। उसने अपने घर के बाहर भी ‘सेना ब्रिगेडियर’ की नेम प्लेट लगवा रखी थी। उसकी कार पर ‘आर्मी’ और ‘डॉक्टर’ भी लिखा हुआ मिला।

नीट परीक्षा में दो बार असफल
आर्यन के पिता अनिल वर्मा उद्यान विभाग में इंस्पेक्टर हैं, जबकि उसकी मां मनोज देवी सरकारी स्कूल में टीचर हैं। आर्यन इंटरमीडिएट पास है और नीट परीक्षा में दो बार असफल हो चुका है। वह दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और 26 मई को घर लौटा था।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि सेना में उच्च पद पर पहुंचने का सपना पूरा न होने के बावजूद उसका जुनून कम नहीं हुआ। उसने पुलिस को बताया कि ब्रिगेडियर बनने का सपना उसका और उसकी मां दोनों का था। इसी कारण उसने जनवरी में यह वर्दी खरीदी थी और खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर घूमने लगा।
सेना के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के साथ दो निजी सुरक्षाकर्मी और एक चालक भी रहता था। चालक के पास से भी भारत सरकार का एक संदिग्ध पहचान पत्र बरामद हुआ है। मामले में इन लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सीओ सिटी पंकज पंत ने बताया-
सेना ने फर्जी ब्रिगेडियर को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और आरोपी से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

