![]()
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में शुक्रवार को 30 अधिकारियों की विशेष टीम ने फव्वारा दवा बाजार में बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 मेडिकल फर्मों पर छापेमारी की। जांच के दौरान 12 दुकानें बंद मिलीं, जिनके संचालकों के नहीं पहुंचने पर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में ताले तोड़कर निरीक्षण किया गया। रिकॉर्ड की जांच में दवाओं के भंडारण और खरीद-बिक्री के बिलों में गड़बड़ियां मिलीं, जबकि दो फर्मों पर ‘नॉट फॉर सेल’ लिखी फिजिशियन सैंपल दवाएं मिलने पर स्टोर सीज कर दिए गए। कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, रजिस्टर और अन्य दस्तावेज खंगाले गए। जांच अभी जारी है। मुख्यालय की टीम ने झूलेलाल बाजार, माहेश्वरी कॉम्प्लेक्स, बोहरे रामगोपाल मार्केट, मुबारक महल, नवाबिया मार्केट और कम्मू टोला क्षेत्र की फर्मों पर छापेमारी की। कई स्टोरों में दवाओं का पर्याप्त भंडारण नहीं मिला, जबकि रिकॉर्ड में बड़े कारोबार दर्शाए गए थे। अधिकारियों ने एंटीबायोटिक, हृदय रोग, पेट रोग और जुकाम-खांसी समेत विभिन्न श्रेणियों की संदिग्ध दवाएं भी चिन्हित की हैं, जिनके नमूने जांच के लिए लिए जाएंगे। टीम ने कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं। कार्रवाई के दौरान बाजार में अफरा-तफरी का माहौल रहा। छापेमारी की सूचना मिलते ही कई फर्म संचालक दुकानें बंद कर चले गए, जिनकी सूची भी तैयार की गई है। विशेष टीम में लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर, एटा और नोएडा समेत 15 से अधिक जिलों के अधिकारी शामिल हैं। रडार पर 450 थोक दवा लाइसेंसधारक दवाओं की तस्करी और कालाबाजारी में बंद या डमी फर्मों के इस्तेमाल के खुलासे के बाद जिले के करीब 450 थोक दवा लाइसेंसधारक औषधि विभाग के रडार पर आ गए हैं। विभाग इन फर्मों का ऑडिट कर रहा है, जिसमें लाइसेंस, जीएसटी रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री का विवरण, गोदाम और दवा भंडारण की स्थिति की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार कई फर्में महीनों बंद रहती हैं, लेकिन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का कारोबार दिखाया जाता है। पूर्व जांचों में भी डमी फर्मों के जरिए सैंपल, सरकारी और नकली दवाओं के कारोबार की गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। अब चरणबद्ध तरीके से इन फर्मों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि सैंपल दवाएं केवल प्रचार-प्रसार के लिए होती हैं और उनकी बिक्री पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में लाइसेंस लेकर प्रतिष्ठान बंद रखे जाते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर कारोबार दिखाया जाता है। पूर्व जांचों में डमी फर्मों के नाम पर दवाओं के कारोबार में अनियमितताएं मिली हैं। ऑडिट के दौरान फर्म संचालक का नाम, पता, लाइसेंस की स्थिति, जीएसटी पंजीकरण, खरीद-बिक्री का विवरण, गोदाम, दवा भंडारण और प्रतिष्ठान के संचालन की स्थिति समेत कई बिंदुओं की जांच की जाएगी। साथ ही सभी फर्मों और गोदामों पर संचालक का नाम, फर्म का नाम और जीएसटी पंजीकरण संख्या दर्शाने वाला बोर्ड लगाना अनिवार्य किया जाएगा।
Source link
12 बंद दुकानों के ताले तोड़कर खंगाले गए रिकॉर्ड:दवा भंडारण और बिलों में गड़बड़ी, दो स्टोर सीज किए, 450 थोक लाइसेंसधारकों का ऑडिट शुरू