लखीमपुर में गन्ना भुगतान बकाया: किसानों ने खोला मोर्चा:दो सप्ताह में भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी


लखीमपुर खीरी में बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ रहा है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला गन्ना अधिकारी को सौंपा है। जिसमें किसानों की समस्याओं के समाधान और बकाया भुगतान की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह के भीतर भुगतान शुरू नहीं कराया गया, तो तीनों चीनी मिलों के गेट पर अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। ज्ञापन में बताया गया है कि वर्षों से भुगतान में हो रही देरी के कारण गन्ना किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। किसानों ने मांग की है कि यदि एकमुश्त भुगतान संभव नहीं है, तो प्रति सप्ताह कम से कम 30 करोड़ रुपये और प्रति माह 120 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त, किसानों ने गन्ना समितियों के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत किसानों को आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। संगठन ने मांग की है कि किसानों को उनकी ऋण सीमा के अनुसार पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने की मांग ज्ञापन में बढ़ती लागत का मुद्दा भी उठाया गया है। किसानों के अनुसार, डीजल, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ने से गन्ना खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने आगामी पेराई सत्र से पहले गन्ने का मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि समय पर भुगतान न मिलने के कारण किसान अपने पुराने कर्ज का ब्याज तक नहीं चुका पा रहे हैं। इसलिए, किसानों को कर्जमुक्त करने के लिए एक विशेष योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही, गन्ना अधिनियम और न्यायालय के आदेशों के अनुसार विलंबित भुगतान पर किसानों को मिलने वाले ब्याज का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि निर्धारित समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो गोला, पलिया और खंभारखेड़ा चीनी मिलों के सामने बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। संगठन की ओर से ज्ञापन पर कई किसान नेताओं के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।

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