वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में फर्जी लाइसेंस पर 17 साल तक प्लेन उड़ाता रहा पायलट; हजारों यात्रियों की जान खतरे में डालने का आरोप


पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार देर रात अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में एयर स्ट्राइक की। तालिबान सरकार के मुताबिक हमलों में 11 बच्चों समेत 13 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 14 महिलाएं घायल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन करते हुए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। हमले पूरी तरह नागरिक क्षेत्रों पर किए गए। मुजाहिद ने बताया कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। उन्होंने हमले के बाद की तस्वीरें भी जारी कीं। तालिबान सरकार के अनुसार पिछले एक साल में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। मार्च में काबुल स्थित एक पुनर्वास केंद्र पर हुए हमले में 269 लोगों की मौत का दावा किया गया था। इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तालिबान सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों को समर्थन देती है। हालांकि तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा में फर्जी लाइसेंस पर 17 साल तक प्लेन उड़ाता रहा पायलट; हजारों यात्रियों की जान खतरे में डालने का आरोप कनाडा की एयरलाइन एयर कनाडा के पूर्व पायलट ज्योफ्री वॉल पर फर्जी लाइसेंस के सहारे 17 साल तक कमर्शियल फ्लाइट उड़ाने का आरोप लगा है। डिप्टी चीफ निक मिलिनोविच ने कहा कि आरोपी ने हजारों यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। पुलिस के मुताबिक वॉल पर 5 हजार डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी, पब्लिक मिसचीफ, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने और नकली प्रमाण चिह्न रखने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। 59 वर्षीय वॉल को 1 जून को गिरफ्तार किया गया। ट्रांसपोर्ट कनाडा की जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के बाद यह मामला सामने आया। आरोप है कि वॉल ने 1998 में एविएशन करियर शुरू किया था और 2009 में फर्जी क्रेडेंशियल के आधार पर पायलट-इन-कमांड यानी कप्तान का पद हासिल कर लिया। इसके बाद वह वर्षों तक हजारों यात्रियों को लेकर उड़ान भरता रहा। मामला तब खुला, जब पिछले साल पियर्सन एयरपोर्ट पर ट्रांसपोर्ट कनाडा की नियमित ऑपरेशनल जांच के दौरान उसके दस्तावेजों में कमियां मिलीं। इसके बाद ‘प्रोजेक्ट इकारस’ नाम से विस्तृत जांच शुरू की गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए और इतने लंबे समय तक सिस्टम की नजरों से कैसे बचा रहा।

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