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शास्त्रीनगर में महिलाएं अपने घरों को बचाने के लिए पिछले दो माह से धरने पर बैठी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास विभाग द्वारा सेटबैक की मांग की जा रही है, जिससे उनके मकानों के ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पत्र सौंपा हैं। इससे पहले महिलाएं जनप्रतिनिधियों से भी मिल चुकी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 661/6 आदेश से जुड़ा है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था। निवासियों ने अपने व्यवसाय बंद कर दिए हैं, लेकिन अब आवास विकास विभाग द्वारा मकानों में सेटबैक छोड़ने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि यदि सेटबैक छोड़ा जाता है, तो उनके मकान पूरी तरह से टूट जाएंगे। राधा गुप्ता, जो 326/2 शास्त्री नगर की निवासी हैं, ने बताया कि उनके सास-ससुर ने करीब 30-35 साल पहले ये मकान किस्तों पर बनाए थे। मुख्य रूप से सेक्टर 2 और सेक्टर 4 में विरोध प्रदर्शन तेज है, क्योंकि यहां अधिकांश मकान 35 से 40 वर्ग मीटर के हैं। महिलाओं का तर्क है कि डेढ़ मीटर का सेटबैक छोड़ने पर उनके पास रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। उनके रोजगार के साधन पहले ही बंद हो चुके हैं। महिलाएं 10 अप्रैल से लगातार जनप्रतिनिधियों और आवास विकास के अधिकारियों से मिलकर गुहार लगा रही हैं। उन्होंने अपने मकानों को बचाने के लिए रुद्राभिषेक, सुंदरकांड और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी किए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इस दौरान निधि गर्ग, मीनू शुक्ला, राधा गुप्ता, बबली शर्मा, नीता शर्मा, पारुल गुप्ता, दिव्या गुप्ता, अंजना जैन, राज मोगा, अर्चना मोगा, कांता मोगा, राजरानी आहूजा, नेहा, दीप जैन, बबीता समेत पुष्पा मौजूद रही।
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शास्त्रीनगर में महिलाएं धरने पर, घर बचाने की गुहार:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेटबैक से मकान टूटने का डर, डीएम से मिले