21वीं सदी के डिजिटल भारत की कड़वी हकीकत:स्टेशन की फर्श पर सोता देश का भविष्य, पेपर लीक के डर के साए में कट रही रातें


एक तरफ बुलेट ट्रेन, डिजिटल इंडिया और विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर 21वीं सदी के नए भारत की तस्वीरें हमारे सामने पेश की जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के बरेली रेलवे स्टेशन से आई ये तस्वीरें देश की एक ऐसी कड़वी और झकझोर देने वाली सच्चाई को बयां करते हैं, जिसे देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए।
दैनिक भास्कर की इस विशेष रिपोर्ट में देखिए कि कैसे अपने सुनहरे भविष्य की तलाश में निकले देश के होनहार छात्र और छात्राएं सिस्टम की लाचारी के कारण दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अभ्यर्थियों का दर्द और उनकी मजबूरियां उनके चेहरों से साफ झलक रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले ये छात्र होटलों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, जिसके कारण वे रेलवे स्टेशन की फर्श पर ही रात गुजारने को मजबूर हैं। “बस इस बार पेपर रद्द न हो, बहुत उम्मीदें हैं” – ज्योति
बंडा खुटार से परीक्षा देने आईं ज्योति ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी यूपी पुलिस और एसएससी जीडी (SSC GD) की परीक्षाएं दी थीं, लेकिन पेपर लीक होने के कारण वे परीक्षाएं रद्द हो गईं।
“इस बार बस यही उम्मीद और सरकार से अपील है कि यह पेपर रद्द न हो। हम लोग इतनी मेहनत करते हैं, 200 किलोमीटर दूर से धक्के खाकर परीक्षा देने आते हैं और रात-रात भर स्टेशन पर काटते हैं। जब पेपर लीक होता है, तो जो मन पर गुजरती है, उसे बयां नहीं किया जा सकता। हम स्टूडेंट हैं, यह दर्द सिर्फ हम ही समझ सकते हैं। हमारे मम्मी-पापा नहीं हैं, घर में सिर्फ भाई, मम्मी और मैं हूँ। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम होटल ले सकें, इसलिए स्टेशन पर ही रुकना पड़ता है। लड़कियां होने के नाते डर भी लगता है, लेकिन अपने पैरों पर खड़ा होने का एक सपना है, जिसके लिए यह सब झेलना पड़ रहा है।” “हर बार लीक हो जाता है हमारा पेपर, कैसे पूरा होगा सपना” – संचिता सक्सेना
बंडा से ही परीक्षा देने आईं एक अन्य अभ्यर्थी संचिता सक्सेना ने अपनी पारिवारिक परिस्थितियों और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा:
“मैंने पहले एसएससी जीडी और होमगार्ड की परीक्षा दी थी, लेकिन दोनों ही पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दिए गए। हमारी मम्मी का देहांत हो चुका है, यह तीसरा साल चल रहा है। घर में पापा, बहन और भाई हैं। सबसे बड़ी होने के कारण पूरी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है। हम हाईस्कूल के समय से ही सेना और पुलिस की तैयारी कर रहे हैं। इतनी मेहनत के बाद भी जब बार-बार पेपर लीक हो जाता है, तो सपना पूरा कैसे होगा? सरकार से हमारी यही मांग है कि बार-बार पेपर लीक न हो, ताकि हमारी मेहनत सफल हो सके। हमारे पास पैसे नहीं हैं, अगर हम होटल का खर्च उठाने के लायक होते तो स्टेशन पर क्यों रुकते?” “किराया भले कम न करो, ठहरने की तो व्यवस्था कर दो सरकार” – रंजीत पाल
सीतापुर से सिपाही भर्ती की परीक्षा देने बरेली आए अभ्यर्थी रंजीत पाल स्टेशन की फर्श पर अपनी किताब का सिरहाना बनाए मिले। उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा:
“हम सालों से दिन-रात इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। साल 2024 में भी परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक हो गया। इस बार फिर पेपर देने आए हैं। होटलों के दाम इतने महँगे हैं कि हमारे पास वहाँ रुकने की स्थिति नहीं है, हमने तो रेट तक नहीं पूछा। सरकार से हमारी यही गुजारिश है कि भले ही हमारा आने-जाने का किराया कम मत करो, लेकिन कम से कम परीक्षा के दिनों में हमारे ठहरने की तो कोई व्यवस्था कर दो। अब मजबूरी में पूरी रात इसी स्टेशन पर जागकर काटनी पड़ेगी और कल इसी थकावट के साथ पेपर देने जाना होगा। परिवार में मम्मी, पापा, भाई और बहन हैं, पापा किसानी करते हैं। उम्मीद लेकर आए हैं, देखिए इस बार क्या होता है।” “दिल में डर है कि कहीं फिर लीक न हो जाए पेपर” – रवि
बुलंदशहर से आए एक अन्य अभ्यर्थी रवि ने बताया कि उन्होंने इससे पहले होमगार्ड की परीक्षा दी थी, लेकिन वह भी लीक होने के कारण रद्द हो गई थी। रवि ने कहा:
“हम बुलंदशहर से बरेली पेपर देने आए थे, पेपर तो दे दिया है लेकिन अब घर जाने के लिए रात के 1 बजे की ट्रेन है, इसलिए स्टेशन पर बैठकर इंतजार कर रहे हैं। मैंने इंटर के बाद डी.फार्मा किया है और साथ में आर्मी (अग्निवीर) की भी तैयारी कर रहा हूँ। सच कहें तो दिल में बहुत डर लगता है कि इतनी दूर धक्के खाकर पेपर देने आओ, इतनी मेहनत करो और बाद में पता चले कि पेपर फिर से लीक हो गया। सिस्टम को इसे रोकना ही होगा।” सिस्टम के गाल पर तमाचा हैं ये तस्वीरें
बरेली जंक्शन के प्लेटफॉर्म के फर्श पर सोए इन नौजवानों की तस्वीरें देश के नीति-निर्माताओं और दावों की पोल खोलती हैं। यह स्थिति सिर्फ एक स्टेशन की नहीं, बल्कि परीक्षा के दिनों में पूरे प्रदेश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों का यही हाल होता है।
21वीं सदी के भारत का युवा आज रोजगार के एक मौके के लिए इस कदर संघर्ष कर रहा है कि उसे बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। अब देखना यह है कि बार-बार लीक होते पेपरों और इन छात्रों की इस बेबसी पर प्रशासनिक अमला और सरकार क्या ठोस कदम उठाती है, ताकि इन युवाओं के संघर्षों का इस तरह मजाक न बने।

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