लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हम फिर भविष्यवाणी करते हुए कह रहे हैं कि फिर यूपी में कमल खिलेगा। समाज को जातियों में नहीं बांटना चाहिए। हमारा कहना है कि चाहे पंत अनेक हों, मगर हिंदू एक हों। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का बहुत उत्पीड़न होता थ
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ये बातें रामभद्राचार्य ने अपनी 1423वीं श्रीराम कथा के दूसरे दिन कहीं। कथा सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में 9 जून तक होगी।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक परिवार के साथ श्रीराम कथा सुनने पहुंचे। उन्होंने रामभद्राचार्य का आशीर्वाद लिया।
राम जी के आदर्श पर चले राष्ट्र
जगद्गुरु ने कहा कि श्रीराम के आदर्श पर जब राष्ट्र चलेगा तो अत्याचार अनादर सब मिट जाएगा। लोग चरित्रवान होंगे। इसीलिए हम ऐसा गुरुकुल बना रहे हैं, जहां से धर्म की, शास्त्र की शिक्षा दी जाए। सनातन धर्म और संस्कृत भाषा के प्रसार प्रचार का काम किया जाएगा। राष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। 140 करोड़ भारतीय हैं सभी के मन में संस्कृति का बोध होना चाहिए।

विधायक डॉ. नीरज बोरा श्रीराम कथा का आयोजन करा रहे हैं।
‘पालकी से गंगा स्नान करने नहीं जाना चाहिए’
रामभद्राचार्य ने कहा कि अपनी इच्छा के लिए कभी राजनीति नहीं करनी चाहिए। हमने भी कभी नहीं किया। आप सभी लोग यह जानते हैं। अपनी इच्छा के लिए जो राजनीति कर रहे हैं, हम उनसे सवाल कर सकते हैं। वे जवाब नहीं दे पाएंगे।
जब गंगा स्नान के समय पुलिस ने जो बात कही थी, उसका पालन करना चाहिए था। पालकी से जाने की क्या आवश्यकता थी? क्या यही साधुवाद है? एक साधु वह होते थे, जो पैदल जाते थे। हम लोग पैदल जाते थे। आज के साधु गंगा के प्रवाह तक पालकी में जाना चाहते हैं।
नवधा भक्ति की व्याख्या की
कथा के दूसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नवधा भक्ति की व्याख्या की। कीर्तन और ईश्वर में अटूट विश्वास को भक्ति का सबसे प्रभावी साधन बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत में माया को नर्तकी कहा गया है। इसी शब्द को पलटने पर ‘कीर्तन’ बनता है। जब कोई व्यक्ति प्रभु का कीर्तन करता है, तो माया का प्रभाव स्वतः समाप्त होने लगता है।
उन्होंने भक्ति का दूसरा महत्वपूर्ण आधार विश्वास को बताया। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति का भगवान पर दृढ़ भरोसा होता है, उसके लिए ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग सहज और सरल हो जाता है।

बड़ी संख्या में लोगों ने कथा सुनी और जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
‘कर्म पर ही मनुष्य का अधिकार’
कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने दायित्व पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए बताया कि कर्म पर ही मनुष्य का अधिकार है। जो व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, उसके पास अधिकार स्वयं आ जाते हैं। उन्होंने कर्मनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता को सफलता का वास्तविक मार्ग बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि सच्ची सेवा प्रभु की सेवा है। सरकारी नौकरी में एक निश्चित समय के बाद सेवानिवृत्ति हो जाती है, लेकिन भगवान की सेवा में कभी रिटायरमेंट नहीं होता। वहां भक्त के योगक्षेम की चिंता स्वयं प्रभु करते हैं। उन्होंने लोगों से अपने जीवन का अधिकाधिक समय लोकमंगल और ईश्वर सेवा में लगाने का आह्वान किया।अपने संबोधन में जगद्गुरु ने रामजन्मभूमि आंदोलन का भी स्मरण किया और कारसेवकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सदैव ईश्वर की व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास रहा है।
डिप्टी सीएम हुए शामिल
कथा के दूसरे दिन डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी शामिल हुए। कथा के बीच में जय श्रीराम के जयकारों से पूरा माहौल भक्ति मय हो गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर आयोजक संस्था उत्सव के पदाधिकारी, भारत लोक शिक्षा परिषद के स्वयंसेवक, श्यामप्रेमी संघ, बोरा फाउण्डेशन सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने हिस्सा लिया।
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