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नौबस्ता की आवास विकास चौकी से सस्पेंड दरोगा शैलेंद्र राघव और चौकी में तैनात दरोगा गौरव सिंह पर अवैध वसूली और धमकाने का आरोप लगा है, जिसकी शिकायत पीड़ित दरोगा के बेटे ने पुलिस कमिश्नर से की है। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर को दिया। पीड़ित ने पुलिस कमिश्रनर को घटना से जुड़ा 7 मिनट पांच सेकेंड का वीडियो और करीब 14 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिं दी है। जिसमें दरोगा का बेटा रोते हुए कहता नजर आ रहा है, कि हमने अपनी जेब से 10 हजार रुपए दिए, जिसके बावजूद मैं गाली खा रहा हूं… दरोगा बेटे के रोने पर आरोपी दरोगा गौरव सिंह उसके आंसू पोछते हुए नजर आ रहा है। वसूली और धमकाने की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए हैं। अब जानिए पूरा प्रकरण… किदवई नगर वाई-वन ब्लाक निवासी शिखर द्विवेदी के पिता मनोज द्विवेदी वर्तमान में गाजियाबाद में तैनात है। शिखर के मुताबिक 29 मई की रात वह अपने बीमार मित्र को देखने अस्पताल जा रहे थे। आरोप है कि आवास विकास पुलिस चौकी के पास कुछ लोगों ने उन्हें रोक कर रुपए मांगे और विरोध पर अभद्रता की। शिकायत लेकर जब वह चौकी पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी बात सुनने के बजाए उनके साथ ही गलत व्यवहार किया। आरोप है कि तत्कालीन चौकी प्रभारी शैलेंद्र राघव ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही मामले को निपटाने के लिए 25 हजार रुपये की मांग की। पिता के दरोगा होने की जानकारी पर 10 हजार रुपये लेकर मामला खत्म करने को कहा। इसके बाद उन्होंने परिचित से रुपये मंगवाकर दरोगा गौरव सिंह को दिए, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया। पीड़ित का दावा है कि पूरी घटना चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। इसके अलावा उन्होंने अपने मोबाइल फोन से भी कुछ वीडियो बनाए। छूटने के बाद अगले दिन थाने पहुंचे तो उन्हें चौकी भेज दिया गया, जहां दोबारा धमकाया गया। अब जानिए दरोगा और पीड़ित के बीच हुई बातचीत के कुछ अंश आवास विकास चौकी के सामने पीड़ित दरोगा के बेटे ने वीडियो बनाते हुए कहा कि– भैया मैने चौकी के बाहर 10 हजार दिए, इसके बावजूद मैं गाली खा रहा हूं। दरोगा गौरव सिंह पीड़ित के आंसू पोछते हुए बोले– कि शांत रहो, शांति से बहुत चीजें होती हैं। मैं हूं ना, मैंने अगर उसको सामने लाकर तुम्हारे सामने नहीं मारा, तो बताना तुम पीड़ित– आपका नाम क्या था ? दरोगा– अरे मेरा ही नाम भूल गए ? पीड़ित– मतलब जेब से पैसा दो, सब कुछ करों, आप भैया प्लीज मेरी एक बार इज्जत रखते हुए इसका 151 करा दो दरोगा– इसका ? चलो ठीक है, हाथ मिलाओं, लेकिन वीरेंद्र पांडेय से मेरा नाम नहीं आना चाहिए, और बताओ तुम? और क्या चाहिए। जब मैं हूं, तो क्यों टेंशन ले रहे हो तुम ? पीड़ित– भैया अब मैं उनके सामने कैसे कह दूं, कि आपने गाली दी थी ? दरोगा– अब तुम कह भी दोगो कि गाली दी, तो वो मानेंगे थोड़ी। अगर मैने इसको 151 में नहीं भेजा तो, हमारा तुम्हारा संबंध खत्म पीड़ित– चलो ठीक है भैया, अब आप जो कहो वो खर्चा है। दरोगा– कोई खर्चा नहीं, अब इसको पहले हम जेल भेजेंगे, इससे तुमको पैसा दिलाएंगे अलग से। पीड़ित– भैया अपमान गले से नीचे उतर नहीं रहा दरोगा– मैने तुम्हारा अपमान किया ? मैं कुछ तुमको बोल सकता हूं? नहीं बोल सकता हूं न। फिर क्यों टेंशन ले रहे हो। मैं इसको जेल न भेजूं तो बताना। अभी बहुत कुछ देखना बाकी है। हम लोग पुलिस वाले है, हम लोग नहीं फंसते क्या ? हम लोग भी तो फंसते हैं। ये सब तो चलता रहेगा। दरोगा बोला, मैंने तुम्हें कितने काम दिलाए पीड़ित के बनाए गए 7 मिनट पांच सेकेंड के वीडियो में दरोगा गौरव सिंह उसे समझाते और आंसू पोंछते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दारोगा यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि उनके बीच लंबे समय से संबंध हैं और उन्होंने उसके कई काम कराए हैं। वीडियो प्रकाश में आने के बाद डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर शिकायत, वीडियो और चौकी के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच कराई जा रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दरोगा का बेटा बोला-10 हजार देने पर गाली मिल रही:आंसू पोछते हुए दरोगा बोला- मैं हूं ना, हम लोग नहीं फंसते क्या ? सब चलता है