![]()
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी के निवासियों ने रविवार को कॉमन एरिया मेंटेनेंस (CAM) शुल्क में 48 प्रतिशत की वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन टाटा के सेल्स और मेंटेनेंस ऑफिस के बाहर किया गया। निवासियों ने बढ़ी हुई दरों को तत्काल वापस लेने और शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता की मांग की है। निवासियों के मुताबिक, सोसायटी का मेंटेनेंस शुल्क ₹4.96 प्रति वर्ग फुट से बढ़ाकर ₹7.30 प्रति वर्ग फुट कर दिया गया है। उनका आरोप है कि यह पिछले एक वर्ष के भीतर दूसरी बड़ी शुल्क वृद्धि है, जिससे हजारों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सोसायटी में रखरखाव सेवाओं का स्तर संतोषजनक नहीं है। उन्होंने लिफ्टों के बार-बार खराब होने, शिकायतों के निस्तारण में देरी, खराब सफाई व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी कमियों जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। निवासियों का कहना है कि इन समस्याओं के बावजूद मेंटेनेंस शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है। प्रदर्शनकारियों ने सोसायटी के फेज-2 और फेज-3 परियोजनाओं में हुई देरी से जुड़े खर्चों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधूरे या विलंबित चरणों से संबंधित कॉमन एरिया और प्रबंधन व्यय का बोझ मौजूदा निवासियों पर डाला जा रहा है, जिसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। निवासियों ने स्वीकार किया कि न्यूनतम वेतन में वृद्धि और बढ़ती परिचालन लागत का मेंटेनेंस शुल्क पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने पिछले 24 महीनों के मेंटेनेंस खातों, एजेंसी शुल्क और अन्य खर्चों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। प्रदर्शनकारी निवासियों ने टाटा रियल्टी, सीबीआरई और सोसायटी प्रबंधन से सात दिनों के भीतर बैठक बुलाने की मांग की है। उनकी अन्य मांगों में शुल्क वृद्धि पर पुनर्विचार, दोहरे प्रबंधन शुल्क को समाप्त करना और रखरखाव सेवाओं में सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करना शामिल है। प्रदर्शन के दौरान निवासी प्रतिनिधियों ने कहा, “हम उचित मेंटेनेंस शुल्क के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन खराब सेवाओं के बीच 48 प्रतिशत की शुल्क वृद्धि स्वीकार्य नहीं है।
Source link
टाटा यूरेका पार्क में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाने पर बवाल:नोएडा में 48% बढ़ोतरी के खिलाफ निवासियों का प्रदर्शन, 7 दिन में बैठक की मांग