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मथुरा नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। यमुना पार क्षेत्र स्थित डंपिंग यार्ड के समीप मृत गोवंश के शव खुले में पड़े मिले, जिससे स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और गोरक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि नगर निगम मृत गोवंश के निस्तारण के नाम पर शुल्क वसूलता है, लेकिन शवों का वैज्ञानिक और निर्धारित मानकों के अनुसार निस्तारण नहीं किया जा रहा है। यह घटना शनिवार को सामने आई। मामले की जानकारी मिलने पर बीएसए कॉलेज क्षेत्र के पार्षद कुलदीप पाठक और यमुना पार क्षेत्र के पार्षद यतेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने डंपिंग यार्ड के आसपास खुले में पड़े मृत गोवंश के शवों को देखकर नाराजगी व्यक्त की और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पार्षदों ने बताया कि मृत पशुओं के निस्तारण के लिए नगर निगम लगभग 2100 रुपये तक का शुल्क लेता है। इसके बावजूद, शवों को खुले गड्ढों में फेंक दिया जाता है, जिससे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। यह स्थिति पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। पार्षदों ने मौके से ही नगर निगम अधिकारियों से फोन पर बात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं किया गया और खुले में पड़े शवों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाने की प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रमुख चौराहों पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा। स्थानीय निवासियों और गोरक्षक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि खुले में पड़े गोवंश के शव धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रहे हैं।
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मथुरा डंपिंग यार्ड में खुले मिले मृत गोवंश:पार्षदों ने नगर निगम को दी आंदोलन की चेतावनी