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मेरठ में बकरीद पर एक बुजुर्ग द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले पर मौलाना मोहम्मद नाज़िम अशरफी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस घटना पर बेहद अफसोस है। उन्होंने कहा कि बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि मेरठ से एक मामला संज्ञान में आया है। एक बुजुर्ग हैं, उनके मुंह पर माइक लगा दिया गया और उनसे ऐसी बात कहलवा दी गई। मुझे अफसोस है कि इस तरह की बात हुई। उन्होंने कहा कि जितने भी भारतीय जनता पार्टी की सरकारें स्टेट में और सेंटर में आई हैं, उसमें मीडिया का बहुत बड़ा अहम रोल है। सारी मीडिया को मैं नहीं कहता, लेकिन कुछ मीडिया चैनलों का, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का इसमें बहुत बड़ा रोल है। मौलाना ने कहा कि संबंधित बुजुर्ग के मुंह पर माइक लगा दिया गया और उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया, जबकि उनकी उम्र काफी है। मुझे अफसोस है कि इस तरह की बात हुई। मैं आप सबसे दरख्वास्त करना चाहता हूं कि जो भी भाई हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हों, खास तौर पर मैं मुसलमानों से यह बात कहना चाहता हूं कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति के लिए किसी भी तरह के गलत अल्फाज इस्तेमाल न किए जाएं। यह गलत है। उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि एक मुख्यमंत्री हैं इसलिए मैं कह रहा हूं, ऐसा नहीं है कि वो प्रधानमंत्री हैं इसलिए मैं कह रहा हूं। अगर मैं हूं, कोई और हो, किसी भी जाति, धर्म, बिरादरी का आदमी हो और हमारे मुल्क में किसी जिम्मेदार ओहदे पर है, जिम्मेदार पद पर है, तो उनके खिलाफ इस तरह के अल्फाजों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। मैं इसके खिलाफ हूं और सबको इसके खिलाफ होना चाहिए। मौलाना ने कहा कि विचार अलग हो सकते है। आपके ख्यालात उनसे नहीं मिलते तो आप और तरीके से कह सकते हैं, मुकदमे कह सकते हैं उनके ऊपर। मुख्यमंत्री के ऊपर मुकदमे थे लेकिन उन्होंने वापस ले लिए। लेकिन तमीज के दायरे में रहकर बात होनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि उनको अपशब्द कहे जाएं, गाली-गलौज की जाए। यह बहुत दुखदायी और बड़ा अफसोसजनक मामला है। मेरे ख्याल से हमें इस चीज से बाज आना चाहिए और यह चीज बहुत गलत है। उन्होंने प्रशासन से भी अपील की। “मैं प्रशासन से भी एक दरख्वास्त करना चाहता हूं कि अगर हो सकता है तो उनकी उम्र काफी है, हो सकता है मानसिक संतुलन उनका खराब हो, उसकी जांच करा दी जाए। दूसरी बात, जो भी लोग इस्लाम के बारे में कहें, किसी ओहदेदार के बारे में कहें, प्रशासनिक अधिकारी के बारे में कहें या किसी पॉलिटिशियन के बारे में कहें, सबके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं कार्रवाई के पक्ष में हूं, कार्रवाई के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन एकतरफा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, सबको साथ लेकर, सबका विकास, सबका साथ, सबका विश्वास भारतीय जनता पार्टी का नारा है, तो कम से कम इस पर खरे उतरें। किसी के साथ हकतरफी न हो। सबके साथ हो और ईमानदारी से हो। हकतरफी नहीं बल्कि हकानियत के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई हो, उसके हम साथ हैं, उसमें कोई दिक्कत नहीं है। अंत में मौलाना अशरफी ने कहा, “मैं फिर यही कहूंगा, चाहे वो बुजुर्ग 80 साल के हों, 90 साल के हों, 17 साल के हों या 22-25 साल के हों, इस तरह के अल्फाजों से वो बाज आएं। जो लोग बोलना नहीं जानते हैं, वो मीडिया चैनलों से बहुत दूर रहें, चाहे कोई यूट्यूबर हो, चाहे कोई नेशनल चैनल हो या कोई भी चैनल हो। मुझे बड़ा दुख है कि इस तरह के अल्फाज मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल किए गए। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के शब्द इस्तेमाल नहीं होने चाहिए।
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CM पर विवादित बयान पर मौलाना नाज़िम अशरफी बोले:मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, कार्रवाई हो लेकिन एकतरफा नहीं