आगरा दवा बाजार में 24 फर्मों पर की चेकिंग:पांच में में गड़बड़ी और 3 मिली बंद, विभाग ने जारी किया नोटिस


फव्वारा बाजार में सेना और ईएसआई अस्पतालों की सरकारी दवाओं के अवैध भंडारण के हालिया खुलासे के बाद औषधि विभाग ने थोक दवा कारोबारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के तहत विभागीय टीम ने क्षेत्र की 24 थोक दवा फर्मों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान तीन फर्में बंद मिलीं, जबकि पांच फर्मों के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और बिलों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। विभाग इन फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। सहायक आयुक्त (औषधि) अतुल उपाध्याय ने बताया कि यह कार्रवाई प्रदेशभर में चल रहे व्यापक सर्वे अभियान का हिस्सा है। अभियान का उद्देश्य दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग और अवैध भंडारण पर प्रभावी रोक लगाना है। निरीक्षण के दौरान फर्मों के लाइसेंस, नवीनीकरण की स्थिति, दुकान और गोदाम के क्षेत्रफल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड तथा फर्म के नियमित संचालन की जांच की गई। सभी संचालकों से निर्धारित प्रपत्र भरवाकर हस्ताक्षर भी कराए गए। औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार और नीलेश शर्मा की टीम ने मेडिसिन कॉम्प्लेक्स और नवाबिया मार्केट में सघन जांच अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार पांच फर्मों में स्टॉक और बिलों के मिलान में अंतर पाया गया है। इन मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए मुख्यालय भेजी जा रही है। दरअसल, पिछले सप्ताह झूलेलाल बाजार स्थित ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े दो अवैध गोदामों का भंडाफोड़ हुआ था। वहां से प्रतिबंधित सैंपल के अलावा मिलिट्री और ईएसआई अस्पतालों की सप्लाई वाली सरकारी दवाएं बरामद हुई थीं। इसके बाद विभाग ने नकली दवा नेटवर्क से संभावित संबंधों के संदेह में 18 अन्य फर्मों की भी जांच की थी, जहां से संदिग्ध दवाएं जब्त कर 85 नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि कुछ लोग बंद पड़ी या फर्जी फर्मों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी और नकली दवाओं की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इसी आशंका के चलते अब शहर के थोक दवा कारोबार की व्यापक जांच की जा रही है, ताकि अवैध गोदामों और फर्जी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

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