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सुप्रीम कोर्ट की सख्त नाराजगी और कड़े निर्देशों के बावजूद राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है। रेत माफिया इस कदर बेखौफ हैं कि वे दिनदहाड़े पुलिस थानों और एसएएफ चेक-पोस्ट के सामने से रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर फर्राटे भर रहे हैं। हाल ही में नेशनल हाईवे 44 और वन विभाग के चेकपोस्ट से सामूहिक रूप से (काफिले के रूप में) रेत ले जाते इन ट्रैक्टरों के वीडियो भी सामने आए हैं, जो चंबल की सुरक्षा व्यवस्था की सरेआम पोल खोल रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार को कल देना है जवाब सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई की सुनवाई और 26 मई को जारी अपने विस्तृत आदेश में चंबल के हालात पर गहरी चिंता जताई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन अब एक संगठित माफिया नेटवर्क का रूप ले चुका है। अदालत ने पाया कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन खुलेआम घूम रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन केवल तब जागता है, जब अधिकारियों की कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी तय होती है। कोर्ट ने इसे पर्यावरण, दुर्लभ वन्यजीवों (घड़ियाल) और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा मानते हुए CCTV निगरानी बढ़ाने, खाली पद भरने और अवैध खनन के फाइनेंसर्स व वाहन मालिकों पर सीधी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश सरकार से 29 मई 2026 (कल) तक जवाब मांगा गया है, जबकि अगली विस्तृत सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी। कागजों पर चाक-चौबंद सुरक्षा, जमीन पर अधिकारी थपथपा रहे पीठ सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासन ने जगह-जगह चेकपोस्ट बनाकर विशेष सशस्त्र बल (SAF) की दो बटालियन तैनात की हैं। इतनी भारी फोर्स की मौजूदगी के बावजूद माफिया की दबंगई कम नहीं हुई है और चेकपोस्ट पर तैनात जवान इन ट्रॉलियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। इस बड़ी नाकामी को छिपाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी केवल घाटों पर डंप पड़ी लावारिस रेत पर ट्रैक्टर चलाकर (नष्टीकरण की कार्रवाई कर) सोशल मीडिया और खबरों में अपनी पीठ थपथपाने में लगे हुए हैं। इन थानों और मुख्य रास्तों से होकर शहर पहुंच रही अवैध रेत चंबल नदी के घाटों से मुरैना शहर में रेत लाने के लिए माफिया नेशनल हाईवे 44 का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद रिठोरा की तरफ से गंजरामपुर होते हुए अंबाह रोड, बाइपास और बड़ोखर से होकर ट्रॉलियां शहर में घुसती हैं। वहीं, देवगढ़ नहर वाले रास्ते से माफिया हाईवे 44 और खंडोली होते हुए शहर पहुंचते हैं। इस पूरे रास्ते में सराय छौला, स्टेशन रोड, देवगढ़ और बागचीनी जैसे प्रमुख थाने पड़ते हैं। इतना ही नहीं, देवरी घड़ियाल चेक पोस्ट, वन डिपो चेक पोस्ट और देवगढ़ नहर पर बने अस्थाई एसएएफ गार्ड चेक पॉइंट से भी ये ट्रॉलियां बेरोकटोक गुजर रही हैं। अधीक्षक बोले- चेकिंग से बचने दूसरे रास्ते तलाश रहा माफिया देवरी चंबल घड़ियाल केंद्र के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान का कहना है कि रेत माफिया पर कार्रवाई के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। खनन पर काफी हद तक लगाम लगी है, लेकिन माफिया के लोग स्थानीय हैं और चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। जहां प्रशासन चेकिंग करता है, वे उन रास्तों को छोड़कर अंदरूनी और दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करने लगते हैं। प्रशासन जल्द ही इन वैकल्पिक रास्तों को खोजकर उन्हें भी पूरी तरह नष्ट करेगा। ……………………….. ये खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई मप्र सरकार को फटकार, कहा- बिना नंबर वाहनों से धड़ल्ले से हो रहा रेत परिवहन राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार समेत राजस्थान और उत्तरप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है…पूरी खबर पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट की फटकार बेअसर, चंबल में रेत माफिया एक्टिव:थानों और SAF चेकपोस्ट के सामने से गुजर रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां; देखें वीडियो