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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अंबेडकरनगर में 16 साल पुराने दो बच्चों की मौत के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पाए मां और उसके कथित प्रेमी को बरी कर दिया। न्यायालय ने कहा कि केवल शक, कथित अवैध संबंध और अधूरे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने पारित किया। हाईकोर्ट ने महिला पुष्पा और सुरेंद्र कुमार वर्मा की आपराधिक अपीलें स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। यह मामला वर्ष 2010 का है। अंबेडकरनगर के अकबरपुर क्षेत्र में आठ वर्षीय प्रिया और तीन वर्षीय शनि के शव गांव के एक कुएं से बरामद हुए थे। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि पुष्पा और सुरेंद्र कुमार वर्मा के बीच कथित अवैध संबंध थे। अभियोजन के अनुसार, बच्ची प्रिया ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद राज खुलने के डर से दोनों बच्चों को कुएं में फेंक दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 16 जुलाई 2016 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। घटना के बाद से पुष्पा जेल में बंद थी, जबकि सुरेंद्र कुमार वर्मा ट्रायल के दौरान जमानत पर था और सजा के बाद उसे जेल भेजा गया था। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की और पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए घटनाओं की पूरी और भरोसेमंद कड़ी प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने गवाहों के बयानों में कई गंभीर विरोधाभास भी पाए। न्यायालय ने यह भी माना कि मेडिकल साक्ष्य हत्या की पुष्टि नहीं करते हैं। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने जिरह के दौरान स्वीकार किया था कि बच्चों के दुर्घटनावश कुएं में गिरकर डूबने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने में हुई तीन दिन की देरी को भी अभियोजन के लिए एक कमजोर पहलू माना। इन परिस्थितियों में, हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
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16 साल पुराने दो बच्चों की मौत का मामला:हाईकोर्ट ने मां और कथित प्रेमी को बरी किया