स्वर्ण आयात संतुलन पर प्रशासन-सर्राफा व्यापारियों की बैठक हुई:जिलाधिकारी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अनावश्यक खरीद सीमित करने की अपील की


सोनभद्र में कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा की अध्यक्षता में सर्राफा व्यापारियों, बुलियन कारोबारियों, राज्य कर विभाग के अधिकारियों और सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और सोने के आयात में संतुलन बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बैठक में कहा कि भारत विश्व के प्रमुख स्वर्ण आयातक देशों में शामिल है। प्रतिवर्ष सोने के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय युद्ध, वैश्विक अस्थिरता और डॉलर की बढ़ती मांग का उल्लेख किया। इन परिस्थितियों के कारण आयात लागत में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न हो रहा है। जिलाधिकारी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताया।
जिलाधिकारी ने अपील की कि बुलियन (सोना-चांदी की ईंट और बिस्कुट) की अनावश्यक खरीद-बिक्री तथा निवेश को सीमित किया जाए। इससे सोने के आयात में कमी लाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है, जिससे देश की आर्थिक मजबूती और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने यह भी बताया कि बीते कुछ वर्षों में स्वर्ण की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। सर्राफा व्यापारियों और एसोसिएशन प्रतिनिधियों ने प्रशासन की अपील का स्वागत करते हुए राष्ट्रहित में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि सोनभद्र जनपद में अधिकांश व्यापार स्वर्ण एवं रजत आभूषणों की खरीद-बिक्री पर आधारित है, जहाँ उपभोक्ता पुरानी ज्वेलरी के बदले नई ज्वेलरी खरीदते हैं।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर बुलियन व्यापार नहीं किया जाता है और वे सदैव शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते रहे हैं। उन्होंने आम जनमानस को भी अनावश्यक बुलियन निवेश से बचने हेतु जागरूक करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा व्यापारियों को आश्वस्त किया गया कि प्रशासन द्वारा व्यापारिक गतिविधियों के सुचारु संचालन, सुरक्षा व्यवस्था एवं आवश्यक प्रशासनिक सहयोग को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही सभी व्यापारियों से अपेक्षा की गई कि वे शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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