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मथुरा में बिजली से संचालित भट्टियों में अब शवों का अंतिम संस्कार होगा। ध्रुव घाट स्थित श्मशान स्थल पर 1675 वर्ग फीट में विद्युत एवं गैस से संचालित शवदाह गृह बनकर तैयार हो गया है। इसका सोमवार को मेयर विनोद अग्रवाल ने पूजन अर्चन कर शुभारंभ किया। यहां दो भट्टी लगाई गई है,जहां एक घंटे में एक शव का अंतिम संस्कार होगा। ध्रुवघाट श्मशान स्थल संचालन समिति करेगी देखभाल मानव जीवन में सेवा संस्कार का सर्वोत्तम कार्य है। ध्रुवघाट शमशान स्थल संचालन समिति के इसी कार्य को देखते हुए नगर निगम द्वारा इस शवदाह गृह के संचालन की जिम्मेदारी इन्हें दी है। इस प्रकल्प से जंगल, लकड़ी, पानी व समय की बचत होगी साथ ही पर्यावरण के लिए यह अति उपयोगी है। संचालन समिति के शशिभानु गर्ग ने कहा हम सब की जिम्मेदारी है कि समाज में फैली भ्रांतियां को दूर कर आम जनमानस का रुझान इस तरफ आकर्षित करें। भगवान का किया पूजन अर्चन मुख्य अतिथि महापौर विनोद अग्रवाल ने विद्युत गैस शवदाह गृह के लोकार्पण अवसर पर अपने व्यक्त करते हुए कहा कि इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि लकड़ी पानी की भी बचत होगी। इससे पहले अतिथियों ने ठाकुर जी की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर पूजन अर्चन किया। कार्यक्रम अध्यक्ष गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, समिति संरक्षक धनेश मित्तल, शशिभानु गर्ग, अध्यक्ष डॉक्टर अशोक अग्रवाल, मंत्री उमेश अग्रवाल, प्रकल्प प्रभारी महेश अग्रवाल द्वारा इस शवदाह गृह का लोकार्पण किया। उपस्थित अतिथियों को समिति अध्यक्ष डॉक्टर अशोक अग्रवाल, मंत्री उमेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राजेश मित्तल व शवदाह गृह के संयोजक महेश अग्रवाल द्वारा बुके व स्मृति चिन्ह भेंट किये गए। निशुल्क होगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम अध्यक्ष गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि लगभग 3. 50 करोड़ की लागत से 1675 वर्ग मीटर में निर्माणाघीन इस शवदाह गृह में दो भट्ठियां हैं। जहां लगभग 1 घंटे में एक शव का संस्कार वैदिक रीति रिवाज से होगा। यह भट्ठियां बिजली, गैस व जनरेटर से संचालित है यहां शवो का निशुल्क संस्कार किया जायेगा। समिति संरक्षक शशिभानु गर्ग ने बताया कि ट्रायल के दौरान पिछले एक महीने में लगभग 30 शवो का संस्कार यहां पर हो चुका है। यहां मुखाग्नि, कपाल क्रिया व सभी प्रकार की वैदिक रीति रिवाज का पालन मौजूद पंडित जी द्वारा कराया जाता है, जो कि पूर्णतः निशुल्क है। कार्यक्रम में इस प्रकल्प को चलाने में सहयोगी संस्थाओं व व्यक्तियों का स्वागत किया गया। यह रहे मौजूद कार्यक्रम का संचालन समिति अध्यक्ष डॉक्टर अशोक अग्रवाल व संयोजन मंत्री उमेश अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर पराग गुप्ता, मनोहर लाल कंबल वाले, पार्षद सुभाष यादव, संतोष पाठक, नवीन मित्तल, योगेंद्र गोयल, कैलाश सिल्कग्रीन, सोमेश अग्रवाल सतीश अग्रवाल रोहित अग्रवाल, योगेश यादव, गोपाल दास अग्रवाल, विजय बहादुर सिंह, डॉक्टर संजय अग्रवाल, संदीप अग्रवाल आदि मौजूद रहे। 30 साल बाद हुआ बनकर तैयार मथुरा में बिजली से चलने वाले शवदाह गृह की प्रक्रिया 1990 में शुरू हुई। शासन से मिले अनुदान से विद्युत शवदाह गृह का भवन 6 साल में 1996 में बनकर तैयार हो गया। जिसके बाद शासन से जो बाकी राशि मिलनी थी वह नहीं मिली। जिसके कारण यह प्रक्रिया रुक गई। विद्युत शवदाह गृह को दोबारा बनाने की उम्मीद 24 वर्ष बाद जागी। AMU ने की स्ट्रक्चर की जांच 24 वर्ष तक भवन के उपयोग में न आने पर इसके स्ट्रक्चर की जांच अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कराई गई। वर्षों तक प्रयोग में न आने के कारण बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो गई जिसे उपयोग लायक नहीं माना गया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मिली रिपोर्ट के बाद जिस हिस्से को खतरनाक बताया गया उसे हटाकर दोबारा नक्शा तैयार कराकर भवन निर्माण किया गया। यह होगा शवदाह गृह में 1675 वर्ग मीटर में बने विद्युत शवदाह गृह में 669 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया है। 159 वर्ग मीटर में बेसमेंट,510 वर्ष मीटर में ग्राउंड फ्लोर,18 वर्ग मीटर में नगर निगम का पंप हाउस,370 वर्ग मीटर में पार्किंग के अलावा 726 वर्ग मीटर एरिया ओपन रखा गया है। इसके लिए 13 मार्च 2018 को 180.85 लाख रुपए स्वीकृत किये गए। इसके बाद अवस्थापना निधि से 8 सितंबर 2021 को 139 लाख और 15 जुलाई 2023 को स्थानीय अवस्थापना निधि से 5 लाख रुपए स्वीकृत किये गए।
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मथुरा में शुरू हुआ विद्युत शवदाह गृह:1675 वर्ग मीटर में हुआ बनकर तैयार,एक घंटे में होगा वैदिक रीति से अंतिम संस्कार