सहारनपुर में रेबीज से 5 दिन बाद बच्ची की मौत:दो इंजेक्शन लगने के बाद भी नहीं बची, मुंह से झाग और शरीर में ऐंठन, निगम का कुत्ते में रेबीज होने से इनकार


सहारनपुर में आवारा कुत्तों के हमलों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। महानगर के खाताखेड़ी इलाके में सात वर्षीय बच्ची की मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि बच्ची की जान रेबीज संक्रमण के कारण गई, जबकि नगर निगम की जांच में संबंधित कुत्ते में रेबीज की पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टर भी मौत की स्पष्ट वजह बताने से बच रहे हैं। जानकारी के अनुसार, खाताखेड़ी निवासी सद्दाम की सात वर्षीय बेटी जिकरा एक मई की शाम ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। रास्ते में एक कुत्ते ने उसके पैर में काट लिया। परिवार के लोगों ने तुरंत उसे टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया। अगले दिन जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन की पहली डोज दिलाई गई। अस्पताल से दूसरी डोज के लिए पांच मई की तारीख दी गई थी। परिजनों के मुताबिक, पांच मई की सुबह बच्ची को दूसरी डोज भी लगवा दी गई थी और तब तक उसकी हालत सामान्य थी। लेकिन दोपहर बाद अचानक उसके मुंह और नाक से झाग निकलने लगे। शरीर में तेज ऐंठन और बुखार की शिकायत होने पर परिवार उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां जांच में शरीर में गंभीर संक्रमण की बात सामने आई। इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिवार का कहना है कि बच्ची की मौत रेबीज के कारण हुई है। हालांकि नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि जिस कुत्ते ने बच्ची को काटा था, उसे पकड़कर जांच कराई गई, लेकिन उसमें रेबीज नहीं मिला। उनके अनुसार बच्ची को पहले से बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं, इसलिए मौत की वजह कोई दूसरी बीमारी भी हो सकती है। बताया गया कि जिस कुत्ते ने बच्ची को काटा था, उसे उसी दिन सुबह एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी कुत्ते को वैक्सीन लगाने के बाद उसके शरीर में प्रतिरक्षा विकसित होने में सात से 14 दिन तक का समय लग सकता है। ऐसे में टीकाकरण के तुरंत बाद कुत्ते को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता। डॉक्टरों का कहना है कि रेबीज संक्रमण के गंभीर चरण में मरीज को मांसपेशियों में ऐंठन, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके भट्ट ने बताया कि जब बच्ची को अस्पताल लाया गया तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। इलाज शुरू किया गया, लेकिन शरीर में संक्रमण तेजी से फैल चुका था और उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि मौत की असली वजह की पुष्टि करना फिलहाल मुश्किल है। जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले फतेहपुर थाना क्षेत्र के गांव चाऊपुरा में आठ वर्षीय बच्चे की कुत्तों के हमले में मौत हो गई थी। वहीं मुजफ्फराबाद क्षेत्र में भी ईंट भट्ठे पर काम करने वाले परिवार के एक बच्चे को कुत्तों ने नोचकर मार डाला था। एसबीडी जिला अस्पताल में रोज बड़ी संख्या में लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में हर महीने तीन हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। लगातार बढ़ रही घटनाओं ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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