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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लगभग 42 साल पुराने एक हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है। राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। निचली अदालत ने इस मामले में सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया था। मामले की सुनवाई के समय ही दो आरोपियों का निधन हो चुका है। शेष बचे दो आरोपियों को हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) यानी गैर इरादतन हत्या के तहत दोषी पाया है। अदालत ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई के लिए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर 11 मई को पेश करने का निर्देश दिया है। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनाया। यह घटना 15 जून 1984 की है, जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के माखी क्षेत्र में पानी की निकासी को लेकर विवाद हुआ था। मृतक जमुना प्रसाद अपने मकान की छत पर नाली बना रहे थे, जिसका आरोपियों ने विरोध किया। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने जमुना प्रसाद और उनके भाई अमृत लाल पर लाठी-भाले से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल जमुना प्रसाद ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था। साल 1986 में सत्र अदालत ने सभी आरोपियों को यह मानते हुए बरी कर दिया था कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी, क्योंकि उन्हें भी चोटें आई थीं और अभियोजन पक्ष इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सका था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मामूली विवाद में किसी की जान लेना आत्मरक्षा के दायरे में नहीं आता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत ठहराते हुए उसे निरस्त कर दिया।
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राज्य सरकार की अपील मंजूर, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला:42 साल पुराने हत्या मामले में दो आरोपी दोषी करार