प्रयाग संगीत समिति की शताब्दी पर NCZCC में विमर्श कार्यक्रम:डिजिटल दौर में शास्त्रीय संगीत के बढ़ते प्रभाव पर हुई चर्चा


प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) द्वारा शनिवार को ‘विमर्श’ श्रृंखला के तहत एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रयाग संगीत समिति की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रयाग संगीत समिति के रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार श्रीवास्तव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराएं देश की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1926 में स्थापित प्रयाग संगीत समिति ने बीते एक शताब्दी में भारतीय संगीत, नृत्य और ललित कलाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। संस्था ने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के साथ कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय, कार्यक्रम प्रभारी कृष्ण मोहन द्विवेदी और सहायक कार्यक्रम अधिशासी मधुकांक मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने समिति की स्थापना से लेकर शताब्दी वर्ष तक की प्रेरणादायी यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। संवाद के दौरान आधुनिक तकनीक के माध्यम से बच्चों को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने के विषय पर भी चर्चा हुई। श्रीवास्तव ने बताया कि आज तकनीक संगीत शिक्षा का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। समिति डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑडियो-वीडियो सामग्री और आधुनिक शिक्षण विधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रही है, जिससे नई पीढ़ी पारंपरिक कला को आधुनिक संसाधनों के साथ आसानी से सीख सके। कार्यक्रम में प्रयाग संगीत समिति के संस्थापक सदस्यों, प्रतिष्ठित गुरुओं और कलाकारों के योगदान पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बदलते समय में अपनाए गए नवाचारों और युवाओं को कला तथा संगीत से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग पर जोर दिया।

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