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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ का लोकार्पण कर राज्य को विकास की नई रफ्तार दी है। हरदोई में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में पीएम मोदी ने 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे को जनता को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने इसे ‘मां गंगा का आशीर्वाद’ और यूपी की नई ‘लाइफ-लाइन’ बताया। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से अब मेरठ से प्रयागराज की दूरी जो पहले 11-12 घंटे में तय होती थी, वह अब महज 5 से 6 घंटे में सिमट जाएगी। विरासत और विकास का अद्भुत संगम प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि जिस तरह मां गंगा हजारों वर्षों से हमारी जीवन रेखा रही हैं, उसी तरह यह एक्सप्रेसवे आधुनिक प्रगति का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल हाई-स्पीड सड़क नहीं है, बल्कि नई संभावनाओं का प्रवेश द्वार है। इसके किनारे फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों के क्लस्टर्स विकसित किए जाएंगे। इससे मेरठ के स्पोर्ट्स सामान, संभल के हैंडीक्राफ्ट, बुलंदशहर के सेरेमिक और प्रतापगढ़ के आंवला उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी। रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ सीएम योगी का सपना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास दिसंबर 2021 में हुआ था, उसे साढ़े चार साल से भी कम समय में पूरा कर लिया गया है। इस महापरियोजना के लिए 1 लाख से अधिक किसानों ने अपनी 18 हजार एकड़ भूमि खुशी-खुशी दी है। सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले जो यूपी अपराध और दंगों के लिए जाना जाता था, आज वह सबसे अधिक एक्सप्रेसवे और 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। सामरिक ताकत: शाहजहांपुर में फाइटर जेट की लैंडिंग सुविधा यह एक्सप्रेसवे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप) बनाई गई है, जहाँ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान जरूरत पड़ने पर लैंड कर सकेंगे। इसके साथ ही, यह एक्सप्रेसवे यूपी के डिफेंस कॉरिडोर को भी मजबूती देगा, जहाँ अब ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का निर्माण हो रहा है। धार्मिक और ईको-टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बढ़ावा पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे से हस्तिनापुर, गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम और प्रयागराज जैसे तीर्थों की राह आसान होगी। यह मार्ग जैन सर्किट और महाभारत सर्किट को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। प्रयागराज के ब्लैकबक रिजर्व और उन्नाव के नवाबगंज जैसे ईको-टूरिज्म स्थलों तक पहुंचना अब आसान होगा। इससे राज्य के पर्यटन राजस्व में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। गंगा एक्सप्रेसवे की विकास यात्रा: 2017 से 2026 तक का सफर 2017-2019: योगी सरकार ने ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का फैसला लिया। डीपीआर और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। 2020-2021: पर्यावरणीय मंजूरियां मिलीं और पीपीपी मॉडल के तहत निर्माण के लिए आईआरबी, अदाणी और एलएंडटी जैसी कंपनियों को टेंडर दिए गए। 18 दिसंबर 2021: पीएम मोदी ने शाहजहांपुर में प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। 2022-2025: कोविड की चुनौतियों और भूमि अधिग्रहण के बावजूद काम नहीं रुका। ड्रोन सर्वे और डिजिटल मॉनिटरिंग से काम को गति दी गई। 29 अप्रैल 2026: प्रधानमंत्री ने हरदोई से एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण किया। डबल इंजन सरकार का ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ योगी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का नया मानक स्थापित किया है: जेवर एयरपोर्ट: नवंबर 2021 में शिलान्यास और मार्च 2026 में पहले फेज का उद्घाटन। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे: जुलाई 2018 में शिलान्यास और नवंबर 2021 में उद्घाटन। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे: फरवरी 2020 में शिलान्यास और जुलाई 2022 में जनता को समर्पित। मेट्रो सेवा: आगरा और मेरठ मेट्रो का संचालन रिकॉर्ड समय में शुरू किया गया।
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यूपी के 12 जिलों की तकदीर बदलेगा गंगा एक्सप्रेस-वे:हर साल होगी 30 हजार करोड़ की बचत, मेरठ से प्रयागराज अब सिर्फ 6 घंटे दूर