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गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कटरिया में हुए निशा विश्वकर्मा हत्याकांड पर शोक संवेदना व्यक्त करने जा रहे कांग्रेस के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन ने रोक दिया। यह प्रतिनिधिमंडल 27 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने वाला था। प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने से पहले ही गाजीपुर में कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं को रात में हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इनमें कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनील राम और नगर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा शामिल थे। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। इस 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में डॉ. अनिल कुमार यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, ओबीसी विभाग एआईसीसी), राजेंद्र पाल गौतम (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी विभाग एआईसीसी), अजय कुमार लल्लू (पूर्व विधायक व एआईसीसी प्रभारी-ओडिशा), सुभाषिनी बुंदेला (सचिव एआईसीसी), जितेंद्र बघेल (सचिव एआईसीसी), तनुज पुनिया (सांसद व प्रदेश अध्यक्ष, एससी विभाग यूपी कांग्रेस), राकेश राठौर (सांसद सीतापुर), कर्मवीर सिंह बौद्ध (राज्यसभा सांसद), मनोज यादव (प्रदेश अध्यक्ष, ओबीसी विभाग यूपी कांग्रेस), वीरेंद्र चौधरी (विधायक), इंदरजीत सिंह (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ओबीसी विभाग एआईसीसी), रवि प्रकाश वर्मा (पूर्व सांसद), अशोक विश्वकर्मा (प्रदेश उपाध्यक्ष, ओबीसी विभाग यूपी कांग्रेस), संकल्प नंदन पटेल (उपाध्यक्ष, ओबीसी विभाग), सूर्यकेश विश्वकर्मा (उपाध्यक्ष, ओबीसी विभाग यूपी कांग्रेस), हनुमंत विश्वकर्मा (पूर्व प्रदेश सचिव, यूपी कांग्रेस), राहुल राजभर (प्रदेश प्रवक्ता, यूपी कांग्रेस), सुनील राम (जिला अध्यक्ष, कांग्रेस गाजीपुर), संदीप विश्वकर्मा (शहर अध्यक्ष, कांग्रेस गाजीपुर), शंभू कुशवाहा (जिला अध्यक्ष, ओबीसी कांग्रेस गाजीपुर) और अनिल यादव (पूर्व संगठन महासचिव यूपी कांग्रेस) शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा, पूर्व प्रदेश सचिव जनक कुशवाहा और जिला अध्यक्ष शंभू कुशवाहा सहित कई स्थानीय नेताओं को एहतियातन हाउस अरेस्ट किया गया था। प्रशासन का उद्देश्य प्रतिनिधिमंडल को कटरिया पहुंचने से रोकना था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास है। वहीं, प्रशासन ने इस कदम को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है।
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निशा विश्वकर्मा हत्याकांड: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल रोका:कई नेता हाउस अरेस्ट, शोक जताने जा रहे डेलिगेशन को नहीं मिली अनुमति