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‘गुरु जी (सौरभ) मुझे धमकी दे रहे थे, कि तुम कुछ मत बताना… कह देना कि वो (दिव्यांश) पुलिया के नीचे भाग गया था, फिर वहीं नीचे पड़ा मिला था। गुरु जी ने उसे बहुत लंबे और मोटे डंडे से मारा था। सारे बच्चे सो रहे थे, मैं भी सो रहा था। गुरु जी ने गद्दा हटाया तो मैं जाग गया। देखा कि वो (दिव्यांश) जमीन पर लेटा था। गुरु जी ने उसका हाथ पकड़ कर घसीटा, वो हिल-डुल नहीं रहा था।’ ‘फिर उसे उठा कर पानी पिलाया और गद्दे में लपेटा। सुबह तक उसकी आंखें पूरी काली हो गई थीं और पैर अकड़ गए थे। दिव्यांश की यह हालत देख कन्हैया डर गए थे, और घबरा रहे थे। मुझे धमका रहे थे कि तुम्हारे मम्मी, पापा को मार देंगे। तुम्हे बेच देंगे और तुम्हारी किडनी बेच देंगे। घर वाले नहीं माने तो तुम्हारे घर वालों का एक्सीडेंट करवा कर मरवा देंगे…’। यह कहना है गुरुकुल में पढ़ने वाले 11 साल के दिव्यांश के मामा जितेंद्र तिवारी के बेटे का। जितेंद्र का बेटा पिछले दो साल से गुरुकुल में पढ़ाई कर रहा था। उसके फोन पर बात करने के बाद ही दिव्यांश गुरुकुल में जाने को लेकर उत्साहित था। दिव्यांश की मौत के बाद यह सारी बातें उसने दिव्यांश की बहन दीपिका को बताई। उन्होंने उसका वीडियो बनाकर दैनिक भास्कर के साथ साझा किया। पहले 2 तस्वीर देखिए दीपिका ने पूछा- कैसे मारा मेरे भाई को ? बच्चे ने आंखों देखी बताई वीडियो में दीपिका उससे पूछती है कि, कैसे मारा मेरे भाई को…? जिस पर वह कहता है कि डंडे से। कैसे मारा…? सवाल पर उसने बताया कि बहुत मारा था, जिससे उसको चक्कर आ गया, फिर उसे नहलाने लेकर बाहर आए। तब तक मैं जाग गया, फिर उसको लिटाया गया। इसके बाद उसे सुबह–सुबह हॉस्पिटल लेकर गए, फिर यहां ले आए। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… लखनऊ के रामानुज भागवत वेद विद्या पीठ के संचालक और महंत सौरभ मिश्रा उर्फ कन्हैया ने 21 अप्रैल को 11 साल के बच्चे दिव्यांश की गुरुकुल में पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोपी रिश्ते में बच्चे का मामा लगता है। 15 अप्रैल को ही पिता नरेंद्र कुमार द्विवेदी ने दिव्यांश का गुरुकुल में दाखिला कराया था। गुरुवार को दिव्यांश के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने पिता की तहरीर पर आरोपी मूल निवासी छतरपुर सौरभ मिश्रा (27) और छतरपुर की ही गर्लफ्रेंड हर्षिता सोनी (23) को गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों वर्तमान में लखनऊ के पारा इलाके में किराये पर रहते थे। मामा ने पुलिस को बताया- दिव्यांश गुरुकुल के नियमों का पालन नहीं कर रहा था। वह कक्षा में शोर मचाता था। बच्चों से बातें करता था। गाना गाता, डांस करता। उसकी शरारत देख अन्य बच्चे भी कुछ ही दिनों में उसके रंग में रंगने लगे थे। जिसे देख मुझे उससे चिढ़ आने लगी थी। इस वजह से तीन दिनों से दिव्यांश की बेरहमी से पिटाई कर रहा था।
मां बोली-बेटे ने गुरुकुल जाने की जिद ठान ली थी ‘8 जुलाई से मेरा बच्चा 12 साल का हो जाता… वो कभी किसी को परेशान नहीं करता था। सुबह 6 बजे उठ कर स्कूल जाता था, कहता था कि मेरा लंच बना दो मुझे देर हो रही है… कभी लंच बनाने में देरी हो जाए तो नाराज होता था, कहता था कि मेरी गाड़ी आने वाली है… मुझे देरी हो रही है।’ ‘ कभी स्कूल जाने में मेरे बच्चे ने आनाकानी नहीं की, वह रोज खुशी से स्कूल जाता था। अप्रैल माह में बेटे ने कोचिंग और स्कूल जाना बंद कर दिया था, वो जिद में आ गया था कि मैं स्कूल नहीं जाऊंगा… मैं अब गुरुकुल में पढ़ाई करूंगा। ‘ 11 साल के इकलौते बेटे की दिव्यांश की मौत के बात ये बातें उसकी मां नीरज द्विवेदी ने बताई। बेटे के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बाद दैनिक भास्कर की टीम मृतक के घर पहुंची, तो उनके घर में रिश्तेदारों का जमावड़ा लगा हुआ था। मां, पिता, बहन के साथ परिवार के हर सदस्य की जुबां में अगर किसी का नाम था, तो सिर्फ दिव्यांश का। दिव्यांश ने हर किसी के दिल में अपनी चुलबुली हरकतों की वजह से जगह बना रखी थी। उसकी हरकतों को याद करते हुए घर में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर एक पल के लिए मुस्कान आ जाती, फिर अचानक उसके जिंदा न रहने की हकीकत सुन बरबस ही आंखों से आंसू छलक पड़ते। दिव्यांश की मां नीरज एक कोने में गुमसुम मासूम बेटे की याद में अकेले बैठी हुई थी, वहीं पिता रिश्तेदारों की सांत्वना से घिरे हुए थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए नौकरी कर रही थी पहली बार दैनिक भास्कर से अपने बेटे का दर्द बयां करते हुए मां नीरज ने बताया कि गुरुकुल जाने को लेकर वह बहुत ही उत्साहित था। मां नीरज ने बताया कि मेरे भाई जितेंद्र का बेटा गुरुकुल में पढ़ता था। दिव्यांश की उससे फोन पर बात हो गई थी, तो उसने कहा था कि मां अब मैं गुरुकुल में ही पढ़ूंगा। मैंने मना किया कि बेटा अभी मत जाओं 5वीं पास कर लो फिर जाना, तो वह बोला कि नहीं मम्मी मैं गुरुकुल ही जाऊंगा। घर में बहुत जिद कर रहा था, कि कपड़े मंगा दो… हम अभी जाएंगे। मामा ने कहा है कि 15 तारीख तक भेज दो। उसकी जिद के आगे मैं हार गई, मैने सोचा कि वह जिद कर रहा है तो उसे भेज दूंगी। मैंने लाल बंगले से बेटे के लिए कपड़े, सैंडल, जूते मंगवाए थे। एक दिन मुझसे दिव्यांश कह रहा था कि फीस दो, जिस पर मेरी बेटी ने स्कॉलरशिप से मिले पैसों में से 5 हजार रुपए फीस दी। मैं अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए ड्यूटी करती थी, कि बच्चे पढ़ कर काबिल बनेंगे। सौरभ बोला था- हमदर्दी दिखाओगी तो बेटा पढ़ नहीं पाएगा घर में दिव्यांश सबसे ज्यादा किससे प्यार करता था…? इस सवाल पर मां ने बताया कि वह अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। बहन के लिए मुझसे लड़ता भी था। उसे पनीर और मैक्रोनी बहुत पसंद थी, जो वह अपनी बहन से बनवाता था। गुरुकुल जाने के बाद सिर्फ दिन में एक बार शाम को मेरी दिव्यांश से बात होती थी। सौरभ मुझसे कहता था कि बेटे से ज्यादा प्रेम मत दिखाओ… हमदर्दी, प्रेम दिखाओगी तो वह पढ़ नहीं पाएगा। हमने सौरभ से कहा कि मेरा बच्चा है, मैं तो उससे रोज बात करूंगी। दिव्यांश ने मुझसे कभी नहीं बताया कि मम्मी, सौरभ मुझे डांटते, मारते हैं। सौरभ जब भी मेरे बेटे से बात कराता था तो अपने सामने कराता था। जब तक मेरा बच्चा मुझसे बात करता था, सौरभ वहीं पर खड़ा रहता था। सौरभ एक हाथ में डंडा लिए बैठे रहता था। दिव्यांश मुझसे कुछ कहना चाहता तो सौरभ तुरंत उससे फोन ले लेता, कहता कि जो बात करनी है मुझसे करो, उससे मत करो। सौरभ ने कहा कि ज्यादा बात मत करो। वरना दिव्यांश रुकेगा नहीं, तो मैने उससे कह दिया था कि नहीं रुकेगा तो मैं उसे वापस बुला लूंगी। मेरा बच्चा पढ़ने में बहुत होनहार था 15 अप्रैल को एडमिशन होने के बाद जब वह पहली बार गुरुकुल गया तो वह बहुत खुश था। मुझसे हंसते हुए बोला कि मम्मी हम गुरुकुल जा रहे हैं। मैंने उसके माथे पर किस किया। उसे कुछ पैसे भी दिए। बहन के साथ लखनऊ तक गया था मेरा बच्चा। गुरुकुल में एक रात मेरी बेटी रुकी भी थी। अगले दिन जब उसने पूछा कि दिव्यांश अच्छा लग रहा है…? तो वह बोला कि– हां दीदी मैं यहीं रुकूंगा। हमारा बच्चा पढ़ने-लिखने में बहुत अच्छा था, मैने सोचा था कि वो बड़ा होकर अच्छा आचार्य बन जाएगा। सौरभ ने भी मुझसे वादा किया था… कि उसे अच्छा पंडित बन जाएगा और घर का सहारा बनेगा। मेरे भाई जितेंद्र तिवारी से बात हुई थी, तो उसने भी कहा था कि हां दीदी बेटे को भेज दो। सौरभ मेरे मामा का बेटा है। मैंने उसके विश्वास में अपने बच्चे को उसके पास भेजा था। मैंने सोचा भी नहीं था कि सौरभ मेरे बच्चे को मार डालेगा। भाई का बैग खंगाल याद कर बिलख उठी दीपिका दिव्यांश की बहन दीपिका अपने भाई की यादों में दिनभर खोई रही। वह उसका किताबों से भरा बैग खंगाल कर उसे याद करती रही। उसने दिव्यांश की आर्ट की नोटबुक दिखाते हुए बताया कि उसे आर्ट का बहुत शौक था। वह दोस्तों के साथ पूरे गांव में दिनभर खेलता था, कई बार तो मैं उसे मारती भी थी, कि दोपहर में नहीं खेलना है। उसे क्रिकेट का बहुत शौक था। जिसे देख कर उसके स्कूल की रश्मि मैम ने उसे एक बैट भी गिफ्ट किया था। वह बहुत ही धार्मिक था। गांव में कही भी रामायण होती थी तो वह पढ़ने जाता था, उसे पूरी रामायण मुंह जबानी रटी हुई थी। मैंने सोचा था कि वह पढ़ लिख लेगा तो घर में सारी सुख–सुविधाएं होंगी। हमसे उसने कहा था कि मेरी फीस के 5 हजार दीदी दे दो, मैं जब कमाऊंगा तो तुम्हे 40 हजार दूंगा… मुझे भेज दो बस। मेरा सपना था कि मेरा एक भाई है उसे काबिल बना दें… जो मेरे मम्मी–पापा का सहारा रहेगा, लेकिन उसने (सौरभ) ने तो मेरे घर का दीपक ही बुझा दिया। हत्यारे मामा के हों टुकड़े-टुकड़े दिव्यांश के पिता नरेंद्र द्विवेदी ने बिलखते हुए कहा कि मेरी बस एक ही इच्छा है कि जितने जख्म मेरे बच्चे के शरीर में थे, उतने ही सौरभ के टुकड़े हों। उसके मकान पर बुलडोजर की कार्रवाई हो। उसके परिवार को कहीं भी सिर छिपाने की जगह न मिले। मेरी 18 अप्रैल को दिव्यांश से बात हुई थी, जिस उसने कहा था कि पापा सब बढ़िया है, गुरु जी बहुत अच्छे से पढ़ाते हैं, बस कहते हैं कि तुम बहुत कमजोर हो। मैंने उससे कहा कि बेटा गुरुकूल की शिक्षा कठिन होती है। उसने कहा कि पापा एक सप्ताह में हम हिंदी और संस्कृत अच्छे से पढ़ने लगेंगे। इसके बाद बेटे से मेरी कोई बात नहीं हुई। इसके बाद हत्यारे मामा ने कहा कि जीजा मैं, दिव्यांश को तीन साल के अंदर पूरा ज्ञान देकर आप को दे दूंगा। यह कहते ही वह बिलख पड़े। ————
यह खबर भी पढ़िए… शैतानी करता था, इसलिए गुरुकुल में पीट-पीटकर मार डाला:लखनऊ में 6 दिन पहले एडमिशन हुआ था; पढ़िए आरोपी महंत का कबूलनामा ‘दिव्यांश गुरुकुल की परंपरा के मुताबिक ढल नहीं पा रहा था, दिनभर शैतानी करता था। 3-4 दिनों से उसकी शैतानियां बढ़ गई थीं। मुझे चिढ़ होने लगी थी। तंग आकर मैंने उसे नंगे पांव घंटों धूप में खड़ा रखा। रातभर थप्पड़, चप्पल, लात-घूसों से पिटाई की। कपड़े उतरवाकर पीठ पर डंडे मारे। उसकी पीठ पर लात मार दी, जिससे वह दूर जाकर गिरा। दीवार से सिर टकरा गया। फिर उसका मुंह दबाया, कई घूसें उसकी पीठ पर जड़ दिए। वह बेसुध हो गया। देखा तो दिव्यांश मर चुका था। फिर कार से शव कानपुर में महाराजपुर के गौरिया गांव स्थित उसके घर के बाहर छोड़कर भाग आया।’पूरी खबर पढ़ें
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दिव्यांश के भाई ने बताई गुरुकुल की आंखों देखी दांस्ता:काली हो गई थी दिव्यांश की आंखे, अकड़ गया था शरीर… गुरु जी ने गद्दे में लपेटा